
महासमुंद से रायपुर गांजा तस्करी मामला: तीन आरोपियों को 20 साल की सजा
विशेष न्यायाधीश ने सुनाया कड़ा फैसला, 2-2 लाख का अर्थदंड भी लगाया
रायपुर। महासमुंद से रायपुर गांजा तस्करी मामले में विशेष न्यायाधीश किरण थवाईत की अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल के सश्रम कारावास और 2-2 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह मामला अगस्त 2024 में थाना मंदिर हसौद क्षेत्र में पकड़ी गई 50 किलो 300 ग्राम गांजा की बड़ी खेप से जुड़ा है।
विशेष लोक अभियोजक भुवन लाल साहू ने बताया कि अदालत ने सतीश अग्रवाल, कामेश्वरी गोस्वामी और सुभाष पटेल को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषसिद्ध मानते हुए कठोर दंड दिया है।
मुखबिर की सूचना पर एनएच-53 पर हुई नाकाबंदी
मामला 10 अगस्त 2024 का है, जब थाना मंदिर हसौद पुलिस को सूचना मिली कि महासमुंद की ओर से एक सफेद स्विफ्ट डिजायर कार में भारी मात्रा में गांजा रायपुर लाया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एनएच-53 पर नाकाबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोका।

कार में सतीश अग्रवाल चालक के रूप में मौजूद थे और उनके साथ कामेश्वरी गोस्वामी भी थीं। तलाशी लेने पर कार से गांजा से भरे पैकेट बरामद हुए।
50 किलो 300 ग्राम गांजा जब्त, दस्तावेज नहीं मिले
मौके पर तौल कराने पर प्रत्येक पैकेट का वजन लगभग एक किलो पाया गया। कुल 50 किलो 300 ग्राम गांजा जब्त किया गया। आरोपियों के पास गांजा रखने या परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। इसके बाद दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
मोबाइल कॉल डिटेल और डिजिटल ट्रांजेक्शन से खुलासा
जांच के दौरान सामने आया कि इस तस्करी के पीछे सुभाष पटेल नामक सप्लायर का हाथ है, जो ओडिशा के ढाबा क्षेत्र का निवासी है। पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल और डिजिटल लेन-देन की जांच की, जिसमें पता चला कि गांजा की बिक्री की रकम फोन-पे के माध्यम से ली जाती थी।
पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने सुभाष पटेल को भी गिरफ्तार कर लिया।
एफएसएल जांच में गांजा की पुष्टि
जब्त गांजा के नमूने एफएसएल रायपुर भेजे गए, जहां परीक्षण में इसे गांजा पाया गया। इसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया।
अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। प्रत्येक को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास और 2-2 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि गांजा तस्करी जैसी संगठित और बड़े पैमाने पर होने वाली अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कड़ी सजा जरूरी है, ताकि समाज में नशे के कारोबार को रोका जा सके।
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