February 24, 2026
Bilaspur High Court का अनोखा मामला: तलाक के बाद फिर साथ आए दंपती, डिक्री रद्द करने की मांग खारिज

Bilaspur High Court का अनोखा मामला: तलाक के बाद फिर साथ आए दंपती, डिक्री रद्द करने की मांग खारिज

Feb 24, 2026

डिवीजन बेंच ने कहा—“कानून भावनाओं से नहीं, प्रक्रिया से चलता है”
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया, जहां आपसी सहमति से तलाक लेने वाले पति-पत्नी ने बाद में रिश्तों में आई नरमी के चलते तलाक की डिक्री रद्द करने की मांग की। हालांकि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कानूनी रूप से यह संभव नहीं है।

आम मामलों से अलग था यह प्रकरण
सामान्यतः फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक की डिक्री देने से इनकार किए जाने पर पति या पत्नी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं। लेकिन इस मामले में स्थिति उलट थी। परिवार न्यायालय द्वारा आपसी सहमति से दिए गए तलाक के फैसले को निरस्त करने की मांग लेकर दोनों पक्ष हाईकोर्ट पहुंचे।

तलाक के बाद फिर बढ़ी नजदीकियां
याचिकाकर्ता पत्नी ने अदालत को बताया कि तलाक के बाद दोनों के रिश्ते सामान्य हो गए हैं। उन्होंने साथ मिलकर शादी की सालगिरह मनाई, यात्रा की और एक-दूसरे के साथ समय बिताया।

अदालत में पेश दस्तावेजों में 11 मार्च से 15 मार्च 2025 तक मथुरा यात्रा की ट्रेन टिकट, होटल बुकिंग और सालगिरह मनाने की तस्वीरें भी शामिल थीं। दंपती ने साथ रहने की इच्छा जताते हुए तलाक की डिक्री रद्द करने की मांग की।

पहले आपसी सहमति से लिया था तलाक
जानकारी के अनुसार, सिविल लाइन क्षेत्र निवासी महिला की शादी मोपका निवासी युवक से हुई थी। कुछ समय बाद रिश्तों में कड़वाहट आने पर दोनों ने अलग रहने का निर्णय लिया और परिवार न्यायालय में आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दी। परिवार न्यायालय ने वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर तलाक की डिक्री पारित कर दी थी।

हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज
मामले की सुनवाई जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच में हुई।
बेंच ने कहा कि तलाक आपसी सहमति से हुआ है और विधिक प्रक्रिया के तहत डिक्री पारित की गई है। ऐसे में उसे रद्द करने का प्रावधान नहीं है।

अदालत ने टिप्पणी की—“कानून भावनाओं से नहीं, तथ्यों और प्रक्रियाओं से चलता है।”

आगे का रास्ता क्या?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दंपती दोबारा साथ रहना चाहते हैं तो उन्हें विधिवत पुनर्विवाह करना होगा। तलाक की डिक्री को सीधे रद्द करने का कोई प्रावधान नहीं है।

 

 

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