
बच्चों के लापता होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से देशव्यापी नेटवर्क की जांच के निर्देश
नई दिल्ली: देशभर में लगातार सामने आ रहे बच्चों के लापता होने के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह यह जांच करे कि क्या इन घटनाओं के पीछे कोई देशव्यापी गिरोह या राज्य-विशिष्ट नेटवर्क सक्रिय है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि यह पता लगाना बेहद जरूरी है कि इन मामलों में कोई निश्चित पैटर्न है या ये केवल आकस्मिक घटनाएं हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को सभी राज्यों से डेटा इकट्ठा कर उसका विश्लेषण करने का निर्देश दिया।

केंद्र सरकार की दलील
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि कुछ राज्यों ने लापता बच्चों और संबंधित अभियोजन के आंकड़े उपलब्ध कराए हैं, लेकिन लगभग एक दर्जन राज्यों ने अब तक अपना डेटा साझा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जब तक पूरा डेटा उपलब्ध नहीं होगा, तब तक सटीक विश्लेषण संभव नहीं है। भाटी ने अदालत को बताया कि सरकार यह जानना चाहती है कि क्या इन घटनाओं के पीछे कोई संगठित गिरोह या विशेष पैटर्न काम कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के सुझाव और सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि बचाए गए बच्चों से बातचीत की जानी चाहिए, ताकि यह समझा जा सके कि इन घटनाओं के पीछे कौन जिम्मेदार है। पीठ ने उन राज्यों की आलोचना भी की, जिन्होंने अब तक आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर वह कड़े आदेश पारित करने से भी पीछे नहीं हटेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता अपर्णा भट्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहल की है और सभी राज्यों को निर्देश जारी कर डेटा उपलब्ध कराने के लिए कहा जाना चाहिए।
एनजीओ की याचिका पर सुनवाई
यह मामला एनजीओ ‘गुड़िया स्वयं सेवी संस्थान’ द्वारा दायर जनहित याचिका पर चल रही सुनवाई का हिस्सा है। याचिका में कई राज्यों में लापता बच्चों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष 9 दिसंबर को केंद्र सरकार को छह वर्षों का राष्ट्रव्यापी डेटा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक समर्पित अधिकारी की नियुक्ति करने को भी कहा था, जो राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के साथ समन्वय सुनिश्चित करे।
पहले भी दे चुका है निर्देश
सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस मुद्दे पर कई महत्वपूर्ण निर्देश दे चुका है। 18 नवंबर 2025 को एक मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने चिंता जताई थी, जिसमें दावा किया गया था कि भारत में हर आठ मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे बच्चों की गुमशुदगी के मामलों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करें और ऐसी जानकारी को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पोर्टल पर तुरंत अपलोड करें। साथ ही, अदालत ने देश में गोद लेने की जटिल प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे और केंद्र सरकार से इसे सरल बनाने को कहा था। कोर्ट का मानना था कि जटिल प्रक्रिया के कारण लोग अवैध तरीकों का सहारा लेने को मजबूर हो सकते हैं।
गंभीर सामाजिक मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की गुमशुदगी को एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा बताया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस दिशा में समन्वित व ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
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