
लाल आतंक का सरेंडर: Bijapur में 30 माओवादियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, सिर पर था 85 लाख का ईनाम
बीजापुर |छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में माओवाद के खात्मे की पटकथा अब धरातल पर उतरती दिख रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ प्रवास के बीच बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को एक और ऐतिहासिक सफलता मिली है। सुकमा में 21 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के ठीक बाद अब बीजापुर में एक डीवीसीएम (DVCM) समेत 30 माओवादियों ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए हैं। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर कुल 85 लाख रुपए का ईनाम घोषित था।
सरकार की नीतियों और ‘नियद नेल्लानार’ का असर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये माओवादी शासन की पुनर्वास नीति और “नियद नेल्लानार” (आपका अच्छा गांव) योजना से प्रभावित होकर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। सरेंडर करने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक है, जिसमें 20 महिला माओवादी और 10 पुरुष माओवादी शामिल हैं। हथियार डालने वाले ये सभी माओवादी क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर फायरिंग, आईईडी (IED) ब्लास्ट, आगजनी और लूटपाट जैसी कई बड़ी घटनाओं में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। इनके सरेंडर को नक्सली संगठन के सूचना तंत्र और स्थानीय नेटवर्क के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।

अधिकारियों के समक्ष डाले हथियार
माओवादियों ने सीआरपीएफ डीआईजी देवेन्द्र सिंह नेगी, एसपी डॉ. जितेन्द्र यादव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष समर्पण किया। शासन की नीति के तहत तत्काल सहायता के रूप में सभी को 50-50 हजार रुपए की नकद प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।
बीजापुर में नक्सलवाद के खिलाफ कड़े आंकड़े
- आत्मसमर्पण (2024 से अब तक): 918 माओवादी।
- गिरफ्तारी (2025 से अब तक): 1163 माओवादी।
- मुठभेड़ में ढेर (अब तक): 231 माओवादी।
गृह मंत्री के प्रवास के बीच बड़ी रणनीतिक जीत
ऐसे समय में जब देश के गृह मंत्री राज्य में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं, बस्तर के दो बड़े जिलों (सुकमा और बीजापुर) में कुल 51 नक्सलियों का सरेंडर होना सुरक्षा बलों की एक बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। बस्तर अब धीरे-धीरे अविश्वास और भय के साये से बाहर निकलकर विकास की राह पर लौट रहा है।
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