
Gariaband : ओडिशा सीमा पर नक्सलियों का ‘वेपन वर्कशॉप’ तबाह, कई हथियारों का जखीरा बरामद
गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद की कमर तोड़ते हुए एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। जिला पुलिस की स्पेशल टीम (ई-30 ऑप्स) ने मैनपुर क्षेत्र के भालूडिग्गी और मेटाल की दुर्गम पहाड़ियों में नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए आधुनिक हथियारों और विस्फोटक सामग्री का एक विशाल जखीरा बरामद किया है। इस कार्रवाई को क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क के खात्मे की दिशा में सबसे बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है।

सरेंडर नक्सलियों के खुलासे ने दिलाई सफलता
पुलिस को यह महत्वपूर्ण कामयाबी हाल ही में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों से पूछताछ के दौरान मिली। गुप्त सूचना मिली थी कि प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) की ओडिशा राज्य कमेटी ने सीमावर्ती पहाड़ियों में ऑटोमेटिक हथियारों और तकनीकी उपकरणों का एक ‘डंप’ (गुप्त भंडार) बना रखा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए 6 फरवरी को गरियाबंद जिला मुख्यालय से ई-30 ऑप्स टीम को सर्चिंग के लिए रवाना किया गया।
36 घंटे का सघन ऑपरेशन: 6 ठिकानों पर छापेमारी
हड्डियां गला देने वाली ठंड और घने जंगलों के बीच पुलिस की टीम ने लगातार 36 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान पहाड़ियों में अलग-अलग 6 स्थानों पर खुदाई कर जमीन के नीचे दबाया गया हथियारों का जखीरा बरामद किया गया।
बरामद हथियारों की सूची
- 02 नग इंसास (INSAS) राइफल और 01 नग .303 राइफल।
- 01 नग सुरका (देशी बीजीएल/रॉकेट लॉन्चर)।
- 2 नग 12 बोर हथियार, 01 नग देशी कट्टा और 02 सिंगल शॉट हथियार।
- 127 जिंदा कारतूस और 08 नग मैगजीन।
- 22 बीजीएल सेल, इलेक्ट्रिक वायर और टेक्निकल वर्कशॉप के आधुनिक उपकरण।

नक्सलियों की ‘हथियार फैक्ट्री’ पर चला ‘विराट’ प्रहार
पुलिस के अनुसार, यह डंप नक्सलियों की उस टेक्निकल टीम का था जो मारे गए शीर्ष माओवादी नेताओं (चलपति, मनोज और गणेश उईके) की निगरानी में काम करती थी। यह टीम न केवल देशी हथियारों का निर्माण करती थी, बल्कि सुरक्षा बलों से लूटे गए ऑटोमेटिक हथियारों की मरम्मत भी करती थी। गरियाबंद पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन विराट” के तहत पिछले डेढ़ वर्षों में अब तक 57 हथियार, 300 कारतूस और भारी मात्रा में डेटोनेटर व आईईडी बरामद किए जा चुके हैं।
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