February 8, 2026
High Court: झूठे दहेज प्रताड़ना केस को माना मानसिक क्रूरता, पति को मिला तलाक

High Court: झूठे दहेज प्रताड़ना केस को माना मानसिक क्रूरता, पति को मिला तलाक

Feb 7, 2026

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए धमतरी फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया है और पति की तलाक याचिका स्वीकार कर ली है। जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि पति और उसके परिजनों को झूठे दहेज प्रताड़ना के मामले में फंसाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।

फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट ने पलटा
दरअसल, इससे पहले धमतरी फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका को खारिज कर दिया था। पति ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए पति को क्रूरता के आधार पर तलाक देने का आदेश पारित किया।

2009 में हुआ था विवाह
धमतरी निवासी धर्मेंद्र साहू का विवाह 28 अप्रैल 2009 को हिंदू रीति-रिवाज से संध्या साहू के साथ हुआ था। शादी के बाद दंपती की दो बेटियां हुईं। हालांकि, कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया।

पत्नी ने दर्ज कराया था दहेज प्रताड़ना का केस
विवाद के चलते पत्नी संध्या साहू ने 10 अप्रैल 2017 को पति, देवर और सास के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए धारा 498ए के तहत मामला दर्ज कराया। इसके बाद वह मायके चली गई और फिर ससुराल वापस नहीं लौटी।

पांच साल बाद सभी आरोपी बरी
दहेज प्रताड़ना मामले में करीब पांच साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद वर्ष 2022 में धमतरी न्यायालय ने आरोप सिद्ध न होने पर पति और उसके परिजनों को बाइज्जत बरी कर दिया।

हाईकोर्ट ने माना मानसिक पीड़ा
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पति और उसके बुजुर्ग परिजनों को पांच वर्षों तक आपराधिक मुकदमे का सामना करना पड़ा। गिरफ्तारी की आशंका, सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस और मानसिक तनाव गंभीर क्रूरता के समान है। कोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति झूठे आरोपों के कारण मुकदमे से गुजरता है और अंततः बरी होता है, तो यह मानना गलत होगा कि उसके साथ क्रूरता नहीं हुई।

2009 की शादी को किया गया भंग
इन सभी तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने पति के प्रति पत्नी के व्यवहार को क्रूर मानते हुए वर्ष 2009 में हुई शादी को भंग करने का आदेश दिया।

पत्नी को गुजारा भत्ता मांगने की छूट
हालांकि, हाईकोर्ट ने पत्नी को भविष्य में स्थायी गुजारा भत्ता के लिए अलग से आवेदन करने की स्वतंत्रता भी प्रदान की है।

 

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