
Chhattisgarh में मुर्दे के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री, परिजन और मूल दर्जधारक हैरान
अभनपुर तहसील का मामला, रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजस्व व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक मृत महिला के नाम से पहले जमीन की रजिस्ट्री कराई गई और बाद में उसी मृतक के वारिसों के नाम वसीयत के आधार पर नामांतरण भी कर दिया गया। मामला उजागर होने के बाद प्रशासन ने संबंधित आदेश पर रोक लगा दी है।
मृत्यु के चार साल बाद दिखाई गई विक्रेता
मीडिया रिपोर्ट में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार अभनपुर तहसील के ग्राम टेकारी स्थित खसरा नंबर 323/1, रकबा 0.360 हेक्टेयर कृषि भूमि से जुड़ा यह मामला है। ग्राम टेकारी निवासी शारदा वर्मा की मृत्यु 23 अप्रैल 2021 को हो चुकी थी, जिसका विधिवत मृत्यु प्रमाण पत्र मौजूद है। इसके बावजूद 24 जून 2025 को कथित रूप से शारदा वर्मा को ही विक्रेता दर्शाते हुए जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई।

पहचान दस्तावेजों के दुरुपयोग का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रजिस्ट्री के दौरान मृतका के पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया। बिना किसी वैधानिक जांच-पड़ताल के रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कर दी गई, जिससे पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जिसके नाम वसीयत, उसकी भी हो चुकी थी मौत
सूत्रों के अनुसार शारदा वर्मा ने अपने पुत्र गुलाब वर्मा के नाम वसीयत की थी। लेकिन अभिलेख बताते हैं कि गुलाब वर्मा की भी मृत्यु 24 फरवरी 2024 को हो चुकी थी। नियमों के अनुसार वसीयत में दर्ज व्यक्ति की मृत्यु के बाद संपत्ति का बंटवारा वैधानिक वारिसों के बीच होना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद वसीयत के आधार पर नामांतरण का आवेदन प्रस्तुत कर दिया गया।
नामांतरण की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक 20 नवंबर 2025 को राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस दौरान न तो मूल दर्जधारकों को कोई सूचना दी गई और न ही आपत्ति दर्ज करने का अवसर मिला। आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज वैध नामों की अनदेखी की गई।
पहले से दर्ज मालिक के नाम की अनदेखी
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित भूमि पहले से कौशल तारवानी पिता उत्तमचंद तारवानी के नाम दर्ज थी। इसके बावजूद अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया गया, जो नियमों के विरुद्ध बताया जा रहा है।
जांच की मांग, प्रशासन पर सवाल
मामला सामने आने के बाद परिजनों और मूल दर्जधारकों में आक्रोश है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल शिकायत के बाद रजिस्ट्री और नामांतरण संबंधी आदेश पर रोक लगा दी गई है और मामले की जांच जारी है।
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