
लगातार बारिश से किसानों की मुश्किलें बढ़ीं, खरीफ फसल को नुकसान
1 जुलाई,2025
धान के बीज बर्बाद होने की आशंका
मॉनसून की शुरुआत के साथ ही हो रही लगातार बारिश ने खरीफ फसल की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बेड़ोडीह गांव के किसान दामोदर वर्मा, प्रभु महतो, छक्कू महतो, इंदुभूषण वर्मा, डीलचंद वर्मा, राजेंद्र वर्मा, भुवनेश्वर महतो, रघुनंदन वर्मा, सीताराम साव, तीतू साव, राजू सिंह, कार्तिक सिंह आदि ने बताया कि धान बीज की बुआई रोहिणी नक्षत्र में और हाइब्रिड बीज की बुआई मृगशिरा व आद्रा नक्षत्र में की जाती है। इस वर्ष मॉनसून के साथ लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी जमा हो रहा है, जिससे बीज बुआई में देरी हो रही है। बारिश से राहत न मिलने पर किसानों को लेवा पद्धति (पानी जमा वाले खेत में जोताई कर बीज डालने की प्रक्रिया) अपनानी पड़ रही है। इससे बीज सड़ने और बर्बाद होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि अधिक पानी के कारण बीज सड़ रहे हैं, जिससे दुबारा बुआई करनी पड़ सकती है। सूखे खेत में बिचड़ा तैयार करना बेहतर होता है, जिससे उपज भी अधिक मिलती है।
भदई फसल की खेती भी प्रभावित

लगातार बारिश ने भदई फसलों की खेती को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। मक्का, झींगा, करैला, कद्दू, कोहड़ा, भिंडी, मूली, और बैंगन की खेती शुरू करने में किसान असमर्थ हैं। कुछ किसानों ने मक्का और भिंडी के बीज बोए, लेकिन पौधों की संख्या बहुत कम है और उनका विकास रुक गया है। मक्का के पौधों में पीलापन दिखाई देने लगा है, जो फसल की सेहत के लिए चिंताजनक है।
प्रखंड कृषि पदाधिकारी का सुझाव
प्रखंड कृषि पदाधिकारी संजय कुमार साहू ने बताया कि अत्यधिक बारिश के कारण खेतों में पानी जमा होने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे बुआई के लिए ऊपरी खेतों या टांड़ वाले स्थानों का चयन करें, जहां पानी जमा न हो। जिन किसानों को नुकसान हुआ है, वे आपदा प्रबंधन के तहत मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं। भदई फसलों के नुकसान को लेकर जिला प्रशासन के निर्देशानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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