
Balod में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 20 साल की सश्रम कारावास की सजा, कोर्ट ने ठहराया दोषी
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के गंभीर मामले में जिला न्यायालय ने सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों के साथ यौन अपराधों में बिल्कुल भी नरमी नहीं बरती जाएगी। यह मामला लगभग दो साल पुराना है, जिसमें प्रेम और लव मैरिज का झांसा देकर आरोपी ने पीड़िता का लगातार शारीरिक शोषण किया।
प्रेम का झांसा देकर किया शोषण
आरोपी जागेश्वर गंडावी (21 वर्ष), निवासी ग्राम नेवारीखुर्द, ने वर्ष 2023 में नाबालिग पीड़िता से बातचीत शुरू की। धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ाई और प्रेम एवं लव मैरिज का झांसा देकर उसे अपने घर बुलाया। नवंबर 2023 से उसने पीड़िता के साथ लगातार शारीरिक संबंध बनाए, जबकि पीड़िता उस समय कानूनी रूप से नाबालिग थी। यह अपराध पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत आता है।

प्रेग्नेंसी के बाद खुलासा
जनवरी 2024 में पीड़िता का मासिक धर्म बंद होने पर उसने आरोपी को बताया। आरोपी ने जांच कराने की बात कही, लेकिन न जांच कराई और न ही इलाज। अगस्त 2024 में पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के साथ ही मामला सामने आया। पीड़िता ने साहस दिखाकर माता-पिता को पूरी घटना बताई। इसके बाद 10 अगस्त 2024 को परिजनों ने बालोद थाना में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस जांच और कोर्ट में पैरवी
शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (पूर्व भारतीय दंड संहिता) की धारा 376(2)(न) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 4, 5(जे)(2)/6 के तहत मामला दर्ज किया। जांच पूरी कर 8 अक्टूबर 2024 को अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया। विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) बसंत कुमार देशमुख ने सशक्त पैरवी की। साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।
सजा और अतिरिक्त आदेश
एफ.टी.एस.सी. (पॉक्सो) के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कृष्ण कुमार सूर्यवंशी ने आरोपी जागेश्वर गंडावी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 1,000 रुपये का अर्थदंड सुनाया। यदि अर्थदंड नहीं भरा गया तो 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
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