
शेयर ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले 11 अंतर्राज्यीय ठग गिरफ्तार, देश के 66 थानों में दर्ज हैं केस
रायपुर | साइबर ठगों के खिलाफ रायपुर रेंज पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। आईजी अमरेश मिश्रा के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ के तहत पुलिस ने 6 राज्यों में दबिश देकर 11 शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये ठग शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन पार्ट टाइम जॉब के नाम पर भोले-भाले लोगों से करोड़ों रुपये डकार चुके हैं। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ देशभर के 66 अलग-अलग थानों में मामले दर्ज हैं।

5 बड़े केस और करोड़ों की ठगी का खुलासा
रायपुर रेंज की साइबर थाना पुलिस ने कुल 5 बड़े मामलों की गुत्थी सुलझाई है:
- केस 1: माया तिवारी पटेल से शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 89 लाख की ठगी।
- केस 2: जयंत चंद्राकर से मुनाफा दिलाने के बहाने 26 लाख की चपत।
- केस 3: सत्येंद्र श्रीवास्तव से ट्रेडिंग के नाम पर 32 लाख लूटे।
- केस 4: कपिल दासवानी से ऑनलाइन जॉब के बहाने 15 लाख की धोखाधड़ी।
- केस 5: राहुल सिंह से अत्यधिक लाभ का झांसा देकर 18 लाख की ठगी।

6 राज्यों में फैला था जाल
पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और बैंक खातों की लेयरिंग की जांच के बाद महाराष्ट्र, यूपी, तेलंगाना, एमपी, राजस्थान और ओडिशा में छापेमारी की।
गिरफ्तार आरोपियों की सूची और उनकी भूमिका
महाराष्ट्र (5 आरोपी):ओंकार बंगारी (पुणे), पवन बुरकुल (जालना), रितेश (नाशिक), साहिल संतोष (नाशिक) और युवराज आठवले (सोलापुर)। ये आरोपी फर्जी बैंक खाते खुलवाने और रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने का काम करते थे।
उत्तर प्रदेश (2 आरोपी):राजू शर्मा (कुशीनगर)— यह ठग यूट्यूबर है और सोशल मीडिया पर ठगी के प्रमोशनल वीडियो वायरल करता था। आकाश बरनवाल (लखनऊ)— यह कमीशन लेकर फर्जी बैंक खातों की व्यवस्था करता था।
अन्य राज्यों से: डोंतामाला किशोर कुमार (हैदराबाद, तेलंगाना), आनंद बड़ोनिया (ग्वालियर, MP), भवानी सिंह राजपूत (अजमेर, राजस्थान) और भागीरथी महतो (सुंदरगढ़, ओडिशा)।

ठगी का ‘मॉडस ऑपरेंडी’: यूट्यूब और व्हाट्सएप का खेल
आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि ये ठग व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर ‘शेयर ट्रेडिंग’ के लुभावने विज्ञापन और फर्जी स्क्रीनशॉट भेजकर लोगों को झांसे में लेते थे। गिरोह में शामिल यूट्यूबर ठगी के वीडियो को प्रमोट करता था ताकि लोगों को भरोसा हो सके। पैसा जमा होते ही ये रकम को ‘लेयरिंग’ (एक बैंक से दूसरे बैंक) के जरिए तुरंत गायब कर देते थे।

देशभर की पुलिस को थी इनकी तलाश
पकड़े गए आरोपियों का नेटवर्क इतना बड़ा है कि इनके खिलाफ अकेले नाशिक, पुणे, हैदराबाद और ग्वालियर जैसे शहरों में दर्जनों एफआईआर दर्ज हैं। रितेश (नाशिक) के खिलाफ 17 और आनंद बड़ोनिया (ग्वालियर) के खिलाफ 14 रिपोर्ट पहले से दर्ज हैं।
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