
भारतमाला परियोजना घोटाला: 48 करोड़ की ठगी के छह आरोपी फरार, EOW की विशेष अदालत ने जारी किया अल्टीमेटम
रायपुर, 29 जून 2025:
भारतमाला सड़क परियोजना में 48 करोड़ रुपये के मुआवजा घोटाले के छह प्रमुख आरोपी कानून की पकड़ से बाहर हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने एफआईआर दर्ज करने के दो महीने बाद इन सभी को फरार घोषित किया है। EOW की विशेष अदालत ने सार्वजनिक सूचना जारी कर बताया कि आरोपियों के निवास पर वारंट भेजे गए थे, लेकिन सभी अनुपस्थित पाए गए, जिसके कारण वारंट वापस कर दिए गए। अदालत ने इन छह आरोपियों को 29 जुलाई 2025 तक उपस्थित होने का अल्टीमेटम दिया है, अन्यथा उनकी संपत्ति जब्त की जा सकती है।
मुख्य आरोपियों पर दर्ज है FIR
EOW ने इस मामले में छह मुख्य आरोपियों—जितेंद्र साहू (पटवारी), बसंती घृतलहरे (पटवारी), निर्भय साहू (एसडीएम), शशिकांत कुर्रे (तहसीलदार), लखेश्वर प्रसाद किरण (नायब तहसीलदार), और लेखराम देवांगन (पटवारी)—के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जांच में सामने आया कि इन अधिकारियों की मिलीभगत से सुनियोजित तरीके से सरकारी खजाने को 48 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। रायपुर कलेक्टर को मिली शिकायत के आधार पर 17 जनवरी 2024 को सौंपी गई रिपोर्ट में इस घोटाले की पुष्टि हुई थी।
निलंबित पटवारी ने की आत्महत्या
इस मामले में निलंबित पटवारी सुरेश कुमार मिश्रा ने शुक्रवार को आत्महत्या कर ली। जांच में उन्हें और नायब तहसीलदार डीएस उइके को दोषी पाया गया था। मिश्रा पर एफआईआर दर्ज होने के बाद से दबाव बढ़ गया था, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।
कैसे हुआ घोटाला?
भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारे के लिए ढेका-उरगा राष्ट्रीय राजमार्ग 130ए का निर्माण हो रहा है। 20 फरवरी 2018 को केंद्र सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए थ्री-डी अधिसूचना जारी की थी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की शिकायत के बाद जांच में खुलासा हुआ कि ग्राम ढेका में जमीनों का 33 बार बंटवारा किया गया, जिससे 76 मालिक बन गए। जांच में पता चला कि ये बंटवारे बैकडेटेड थे और अधिसूचना जारी होने से पहले ही 2017 में किए गए थे।

NHAI ने इसे सुनियोजित भ्रष्टाचार करार दिया, क्योंकि 22 बंटवारे एक ही दिन और 11 बंटवारे अगले दिन किए गए थे। इस हेराफेरी से मुआवजे की राशि में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। NHAI ने इस मामले को आयुक्त/आर्बिट्रेटर न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसके आदेश पर हुई जांच में घोटाले की पुष्टि हुई।
EOW और ACB की कार्रवाई
EOW और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, महासमुंद, नया रायपुर और अभनपुर में 20 स्थानों पर छापेमारी की थी। छापों में नकदी, गहने और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए, जो फर्जी मुआवजा दावों से जुड़े थे। इस घोटाले में 324 करोड़ रुपये मुआवजे के लिए आवंटित किए गए थे, जिसमें से 246 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है, जबकि शेष 78 करोड़ रुपये को फ्रीज कर दिया गया है।
राजनीतिक हलचल और CBI जांच की मांग
इस घोटाले को लेकर विपक्षी नेता चरणदास महंत ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की थी। PMO ने इस शिकायत का जवाब दिया, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक CBI जांच शुरू नहीं की है। लोकसभा सांसद ज्योत्सना चारणदास महंत ने इस मुद्दे को संसद में उठाया, जिसके बाद कांग्रेस विधायकों ने विरोध में वॉकआउट किया।
आगे की कार्रवाई
EOW और ACB इस मामले में गहन जांच कर रहे हैं और फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी तेज कर दी गई है। विशेष अदालत के आदेश के बाद यदि आरोपी 29 जुलाई तक पेश नहीं होते, तो उनकी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस घोटाले ने भारतमाला परियोजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं और जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी हैं।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



