
भिलाई में GST विभाग की बड़ी कार्रवाई
दुर्ग-भिलाई। दुर्ग जिले के भिलाई स्थित हरिओम इंगोट्स एंड पावर लिमिटेड में जीएसटी विभाग की छापेमारी कार्रवाई दूसरे दिन भी लगातार जारी रही। टैक्स चोरी की आशंका के चलते शुरू की गई यह जांच देर रात तक चलती रही, जिसमें विभागीय अधिकारियों ने कंपनी के बीते पांच वर्षों के रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं।

लाइट इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कंपनी परिसर में जांच
भिलाई के लाइट इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित कंपनी परिसर में जीएसटी विभाग की टीम ने दस्तावेजों की गहन जांच की। अधिकारियों द्वारा स्टॉक, प्रोडक्शन, आयात-निर्यात और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े कागजातों का बारीकी से मिलान किया जा रहा है।
टैक्स चोरी की आशंका, वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, टैक्स चोरी की आशंका के चलते यह कार्रवाई शुरू की गई है। जांच के दौरान कंपनी के बिल, इनवॉइस, जीएसटी रिटर्न, टैक्स भुगतान और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से संबंधित दस्तावेजों की विस्तार से जांच की जा रही है।

7 से 8 अधिकारियों की टीम कर रही जांच
जीएसटी विभाग की 7 से 8 अधिकारियों की टीम सोमवार शाम करीब 4 बजे कंपनी पहुंची थी। इसके बाद से लगातार दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। दूसरे दिन भी देर रात तक कार्रवाई जारी रही। वहीं कंपनी के कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी के डायरेक्टर मौके पर मौजूद नहीं हैं।
कंपनी के तीन डायरेक्टर, राजनीतिक कनेक्शन की चर्चा
जानकारी के अनुसार, कंपनी में कुल तीन डायरेक्टर हैं—
•संदीप अग्रवाल
•संतोष अग्रवाल
•भगवानदास अग्रवाल
बताया जा रहा है कि यह कंपनी पूर्व साडा अध्यक्ष सत्यनारायण अग्रवाल के परिवार से जुड़ी हुई है, जिससे मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

400 से 500 करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि हरिओम इंगोट्स एंड पावर लिमिटेड का सालाना टर्नओवर करीब 400 से 500 करोड़ रुपये के बीच है। कंपनी का व्यापारिक लेनदेन महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश तक फैला हुआ है, इसलिए दोनों राज्यों से जुड़े दस्तावेजों और ट्रांजेक्शनों का भी मिलान किया जा रहा है।
ITC के गलत दावे और टैक्स भुगतान पर फोकस
जांच टीम का मुख्य फोकस इस बात पर है कि कहीं कंपनी द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत दावा तो नहीं किया गया है या टैक्स भुगतान में किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं है। टैक्स जमा करने से जुड़े दस्तावेज भी टीम को मिले हैं, जिनका मिलान अन्य रिकॉर्ड से किया जा रहा है।
जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी सच्चाई
विभागीय जानकारों का कहना है कि सभी दस्तावेजों की पूरी जांच और मूल्यांकन के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि टैक्स चोरी हुई है या नहीं। यदि टैक्स चोरी पाई जाती है, तो उसकी वास्तविक राशि भी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
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