
वन अफसरों ने सागौन की अवैध कटाई कराकर बनवाए लग्जरी फर्नीचर, Raipur की टीम छापामार जप्त किया अवैध चिरान
बालोद | छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में वन विभाग का एक ऐसा कारनामा सामने आया है जिसने महकमे की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन कंधों पर जंगलों को बचाने की जिम्मेदारी थी, उन्हीं अधिकारियों पर बेशकीमती सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई कराकर अपने घरों के लिए फर्नीचर बनवाने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायत के बाद रायपुर से आई विशेष टीम ने छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध चिरान और तैयार फर्नीचर जप्त किया है।

साजिश: जंगल से काष्ठागार और फिर कारपेंटर तक
जांच में खुलासा हुआ है कि यह कोई मामूली चोरी नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी। डौंडी परिक्षेत्र के बीटेझर बिट से सागौन के हरे-भरे पेड़ों को काटा गया। इसके बाद लकड़ियों को सुरक्षित रूप से वन विभाग के काष्ठागार (Depot) लाया गया। वहां से लकड़ियों को आरा-मिल भेजकर फर्नीचर के लिए साइज में कटवाया गया और फिर कारपेंटर के पास भेजा गया।
इन बड़े अफसरों पर उंगली
इस पूरे मामले में तत्कालीन वनमंडल अधिकारी (DFO) अभिषेक अग्रवाल, डौंडी रेंजर जीवन लाल भोंडेकर, और बिट गार्ड ईश्वर साहू सहित कई अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि अधिकारियों को खुश करने के लिए उड़नदस्ता की सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल कर लकड़ी तस्करी की गई।
रायपुर की टीम ने की बड़ी जप्ती
मामले की शिकायत मिलने के बाद रायपुर से उड़नदस्ता की टीम बालोद पहुँची। टीम ने निम्नलिखित स्थानों पर दबिश दी:
- काष्ठागार: यहाँ रखी अवैध सागौन की लकड़ियाँ जप्त की गईं।
- कारपेंटर की दुकान: यहाँ से टी-टेबल, ड्रेसिंग टेबल और अन्य तैयार फर्नीचर के चिरान बरामद किए गए।

जिम्मेदारों की चुप्पी और बढ़ता संदेह
जब इस मामले में वर्तमान एसडीओ (SDO) जीवन लाल सिन्हा से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट जानकारी देने के बजाय मामले को टाल दिया। अधिकारियों की यह चुप्पी विभाग के भीतर चल रहे ‘अवैध खेल’ की ओर इशारा कर रही है। आज फिर रायपुर से वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम विस्तृत जांच के लिए बालोद पहुंच रही है।
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