
छत्तीसगढ़ High Court का बड़ा फैसला, अधिकारी मीनाक्षी भगत के डिमोशन पर लगी रोक
बिलासपुर | छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य शासन के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत एक महिला अधिकारी को पदोन्नति के तीन साल बाद वापस मूल पद पर भेजने (डिमोशन) का निर्णय लिया गया था। मामला आदिम जाति विकास विभाग से जुड़ा है, जहाँ सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर कार्यरत मीनाक्षी भगत के डिमोशन आदेश को चुनौती दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता मीनाक्षी भगत की नियुक्ति वर्ष 2008 में सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर हुई थी। वरिष्ठता सूची में प्रथम स्थान पर होने के कारण विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) ने उनके नाम की अनुशंसा की थी। इसके आधार पर दिसंबर 2022 में उन्हें सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया।

हालांकि, विभाग के कुछ अन्य कर्मचारियों ने इस पदोन्नति को न्यायालय और विभाग के समक्ष चुनौती दी थी। इसके बाद विभाग ने 11 दिसंबर 2025 को एक पुनरीक्षित बैठक की और संवर्ग में पद रिक्त न होने का हवाला देते हुए 31 दिसंबर 2025 को मीनाक्षी भगत को वापस सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर डिमोट करने का आदेश जारी कर दिया।
हाईकोर्ट में दी गई दलीलें
मीनाक्षी भगत ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और नरेंद्र मेहेर के माध्यम से इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में प्रमुख रूप से दो आधार लिए गए:
- प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: याचिकाकर्ता पिछले तीन वर्षों से उच्च पद पर नियमित रूप से कार्य कर रही थीं। उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई का अवसर दिए अचानक डिमोट कर दिया गया।
- नियमों की अनदेखी: पदोन्नति के बाद इस तरह का डिमोशन सेवा नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
न्यायालय का आदेश
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पीपी साहू की एकल पीठ में हुई। तर्कों को सुनने के बाद न्यायालय ने आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी डिमोशन आदेश के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही, हाईकोर्ट ने उत्तरवादियों (राज्य शासन व अन्य) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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