
NDPS और E-साक्ष्य में लापरवाही नहीं! दुर्ग में विवेचकों को सिखाई गई ‘जीरो एरर’ जांच प्रक्रिया
दुर्ग। नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों और डिजिटल साक्ष्यों में विवेचना के दौरान होने वाली गंभीर त्रुटियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से दुर्ग पुलिस द्वारा E-साक्ष्य एवं एन.डी.पी.एस. एक्ट को लेकर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पुरानी पुलिस लाइन, दुर्ग स्थित प्रशासनिक भवन के दधीचि प्रशिक्षण हॉल में संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल (भापुसे) ने पुलिस अधिकारी एवं विवेचकों को एनडीपीएस मामलों में कानूनी प्रावधानों की बारीकियों से अवगत कराया। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि विवेचना में की गई छोटी-सी चूक भी अपराधियों को लाभ पहुंचा सकती है, इसलिए जांच की प्रत्येक कड़ी मजबूत होनी चाहिए।

इन चीजों को लेकर दी जानकारी
उन्होंने नशीली टेबलेट व कैप्सूल से जुड़े मामलों में कार्यवाही, धारा 50 NDPS के अंतर्गत व्यक्तिगत तलाशी की प्रक्रिया, घटनास्थल पर स्पष्ट व त्रुटिरहित दस्तावेज तैयार करने, ओवरराइटिंग से बचने, सैंपलिंग के तुरंत बाद जप्त मादक पदार्थ को एफएसएल भेजने, संपत्ति पत्रक में सील लगाने तथा धारा 42 (मुखबिर सूचना पंचनामा), धारा 52-A, धारा 55 (चेन ऑफ कस्टडी) और धारा 57 के तहत संपूर्ण कार्यवाही की विधिवत जानकारी दी।
75 पुलिस अधिकारी एवं विवेचक उपस्थित
इसके साथ ही एनडीपीएस मामलों में एक से अधिक आरोपियों की स्थिति में धारा 29 NDPS की कार्यवाही, आगजनी व दुर्घटना मामलों में संपत्ति का स्पष्ट विवरण, मर्ग जांच में परिस्थितिजन्य कारणों का उल्लेख, आदतन अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और अधिक से अधिक चालानी कार्यवाही पर विशेष जोर दिया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में चन्द्र प्रकाश तिवारी, उप पुलिस अधीक्षक (लाइन) दुर्ग, नीलकंठ वर्मा, रक्षित निरीक्षक सहित जिले के लगभग 75 पुलिस अधिकारी एवं विवेचक उपस्थित रहे।
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