
Durg में म्युल अकाउंट गैंग पर बड़ी कार्रवाई, एक और फरार आरोपी गिरफ्तार
दुर्ग। जिले में साइबर ठगी और म्युल अकाउंट के नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। दुर्ग पुलिस ने म्युल अकाउंट गैंग के एक और फरार आरोपी विशाल मसीह को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। इससे पहले इस संगठित गिरोह के 05 आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।
ATM, पासबुक और सिम कार्ड का बड़ा जखीरा पहले ही बरामद
पुलिस की कार्रवाई में अब तक आरोपियों के कब्जे से
- 78 ATM/क्रेडिट कार्ड
- 21 चेकबुक
- 18 बैंक पासबुक
- 16 अलग-अलग कंपनियों के सिम कार्ड
जप्त किए जा चुके हैं, जो साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।
20 हजार रुपये का लालच देकर खाते खरीदे जाते थे
पुलिस के अनुसार, दिनांक 30 दिसंबर 2025 को थाना पद्मनाभपुर में दर्ज शिकायत के बाद मामले का खुलासा हुआ। प्रार्थी ने बताया कि उसके मोबाइल दुकान में काम करने वाले अमित मिश्रा के माध्यम से लोकेश जाधव उर्फ लक्की से पहचान हुई। लोकेश ने “बाहर से पैसा आने” का हवाला देकर 20,000 रुपये के लालच में बैंक अकाउंट देने की डील की।

प्रलोभन में आकर प्रार्थी ने एक्सिस बैंक महाराजा चौक और आईडीबीआई बैंक कुम्हारी के खाते आरोपी को सौंप दिए। बाद में खाता फ्रीज होने पर शक गहराया और पुलिस में शिकायत की गई। एफआईआर दर्ज होते ही मुख्य आरोपी लोकेश जाधव महाराष्ट्र के कल्याण भागने की फिराक में था, जिसे दुर्ग बस स्टैंड से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से
- 33 ATM/क्रेडिट कार्ड
- 15 चेकबुक
- 9 पासबुक
- 12 सिम कार्ड
बरामद किए गए।
भाई के साथ मिलकर चला रहा था म्युल अकाउंट सप्लाई रैकेट
पूछताछ में लोकेश ने बताया कि वह अपने बड़े भाई टवन कुमार जाधव के साथ मिलकर म्युल अकाउंट सप्लाई करता था। उसकी निशानदेही पर बोरसी स्थित घर से और भी ATM, पासबुक और सिम कार्ड बरामद किए गए। इसके बाद पुलिस ने विनय सिंह सेंगर, राजू गायकवाड़ और अमित मिश्रा को भी गिरफ्तार किया।
अब फरार आरोपी विशाल मसीह भी गिरफ्त में
प्रकरण में फरार चल रहे आरोपी विशाल मसीह (27 वर्ष), निवासी सेक्टर-6 भिलाई नगर को 12 जनवरी 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। उसके कब्जे से भी विभिन्न बैंकों की पासबुक और ATM कार्ड बरामद किए गए हैं।
इन धाराओं में दर्ज है मामला
थाना पद्मनाभपुर में अपराध क्रमांक 566/25
धारा 317(4), 319(2), 61, 42(2), 42(3) बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।
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