
डॉक्टर दंपति का तलाक मंजूर: High Court ने कहा – बिना सबूत चरित्र पर शक मानसिक क्रूरता
पति को 25 लाख का गुजारा भत्ता देने का आदेश, 2014 से अलग रह रहे थे
बिलासपुर, 11 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बिना किसी ठोस सबूत के जीवनसाथी पर अवैध संबंधों (एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर) जैसे गंभीर आरोप लगाना स्पष्ट रूप से मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इस आधार पर कोर्ट ने एक डॉक्टर दंपति के बीच तलाक को मंजूरी दे दी है। पति की तलाक याचिका स्वीकार करते हुए अदालत ने पत्नी को एकमुश्त 25 लाख रुपये का गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया है।
शादी 2008 में हुई, 2014 से अलगाव
सारंगढ़ (रायगढ़ जिला) निवासी एक डॉक्टर की शादी 2008 में भिलाई की रहने वाली एक महिला डॉक्टर से रायगढ़ में हुई थी। दोनों ही पेशे से चिकित्सक हैं। शादी के कुछ समय बाद उनकी एक बेटी हुई, लेकिन वैवाहिक जीवन में जल्द ही दरार आ गई। दोनों पक्ष 2014 से अलग-अलग रह रहे हैं।

पति के आरोप: अपमान, झूठे चरित्र हनन के दावे
पति ने आरोप लगाया कि पत्नी का व्यवहार अपमानजनक हो गया। वह छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करती, मांग में सिंदूर नहीं लगाती, मंगलसूत्र पहनने से इनकार करती और बार-बार उसके चरित्र पर निराधार आरोप लगाकर मानसिक प्रताड़ना करती थी। यहां तक कि जानलेवा हमले का भी आरोप लगाया गया। पति ने दुर्ग फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में अपील की।
पत्नी के आरोप निराधार पाए गए
पत्नी ने पति पर किसी अन्य महिला डॉक्टर से संबंध होने का आरोप लगाया और दावा किया कि वह महिला घर में घुसकर तोड़फोड़ करती थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इन आरोपों को बिना सबूत के निराधार माना। कोर्ट ने नोट किया कि अप्रैल 2019 में दोनों साथ में फिल्म देखने गए थे, इसलिए केवल अलग रहने के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता। हालांकि, पत्नी द्वारा लगाए गए झूठे चरित्र हनन के आरोपों को मानसिक क्रूरता का सबसे गंभीर रूप बताते हुए तलाक मंजूर कर दिया।
कोर्ट का महत्वपूर्ण अवलोकन
जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि एक शिक्षित जीवनसाथी (खासकर डॉक्टर जैसी पेशेवर महिला) द्वारा बिना प्रमाण के पति के चरित्र पर शक करना और अवैध संबंधों का आरोप लगाना क्रूरता का सबसे निंदनीय रूप है। इससे पति को गंभीर मानसिक पीड़ा हुई, जो हिंदू मैरिज एक्ट के तहत तलाक का आधार बनती है।
गुजारा भत्ता और बेटी की जिम्मेदारी
कोर्ट ने दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पत्नी को 25 लाख रुपये का एकमुश्त गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। यह राशि 6 महीने के भीतर दी जाएगी। बेटी की परवरिश और भविष्य से जुड़े अन्य मुद्दों पर अलग से विचार किया जा सकता है।
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