
10 बेटियों के बाद बेटे की चाह! Haryana में हाई-रिस्क डिलीवरी से जन्मा 11वां बच्चा, सोशल मीडिया पर मचा बवाल
जींद/फतेहाबाद। हरियाणा के जींद जिले के उचाना कस्बे में एक महिला ने 10 बेटियों के बाद 11वें बच्चे के रूप में बेटे को जन्म दिया है। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और एक बार फिर समाज में बेटे की चाहत, परिवार नियोजन, मां की सेहत तथा लैंगिक भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस छिड़ गई है।
घटना का विवरण
फतेहाबाद जिले के ढाणी भोजराज गांव निवासी संजय कुमार और उनकी पत्नी सुनीता की शादी 2007 में हुई थी। पिछले 19 वर्षों में दंपती को 10 बेटियां हुईं। 11वीं बार गर्भवती होने पर महिला को जींद के ओजस अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, यह हाई-रिस्क डिलीवरी थी क्योंकि महिला का हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 5 ग्राम रह गया था और उन्हें तीन यूनिट खून चढ़ाना पड़ा। नवजात में भी खून की कमी थी, लेकिन समय पर इलाज से मां-बेटा दोनों स्वस्थ हैं। बेटे का नाम ‘दिलखुश’ रखा गया है। परिवार ने खुशी में मिठाइयां बांटीं और अस्पताल को सजाया।

संजय कुमार, जो दिहाड़ी मजदूर हैं, ने कहा कि वे बेटियों को बोझ नहीं मानते और सभी को पढ़ा रहे हैं। सबसे बड़ी बेटी 12वीं कक्षा में पढ़ती है। उन्होंने बताया कि बेटा होने की इच्छा उनकी और बड़ी बेटियों की भी थी, लेकिन यह भगवान की मर्जी है।
सोशल मीडिया पर बवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर अस्पताल से एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें संजय कुमार से उनकी 10 बेटियों के नाम पूछे गए। वे कुछ नाम भूल गए, जिस पर यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने इसे पितृसत्तात्मक सोच का प्रमाण बताया और कहा कि बच्चे का लिंग भविष्य की गारंटी नहीं देता। अक्सर बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल बेटियां ही करती हैं।
कुछ यूजर्स ने माता-पिता की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए और इतने बच्चों को पालने की क्षमता पर चिंता जताई। एक पोस्ट में लिखा गया, “बेटे की चाह में मां की जान जोखिम में डालना और बेटियों को ‘ट्रायल’ की तरह देखना गलत है।” वहीं, कुछ ने इसे गरीबी और अशिक्षा से जोड़ा। एक राजनीतिक संदर्भ में भी टिप्पणियां आईं, जहां जनसंख्या नियंत्रण और लैंगिक समानता पर बहस हुई।
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