
धान खरीदी में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई: Raigarh में 3 समिति प्रबंधक निलंबित, दो का वित्तीय प्रभार समाप्त
रायगढ़। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत धान खरीदी में पारदर्शिता और शासन निर्देशों के सख्त पालन को लेकर रायगढ़ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। विभिन्न धान खरीदी केंद्रों के निरीक्षण और जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के अनुमोदन से दोषी समिति प्रबंधकों और सहायकों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

जांच में यह खुलासा हुआ कि कई सहकारी समितियों में शासन द्वारा निर्धारित ढांचा पद्धति के अनुसार धान परीक्षण नहीं किया जा रहा था। किसानों द्वारा बोरियों में लाए गए धान को बिना गुणवत्ता जांच सीधे शासकीय बोरियों में भरकर तौल किया जा रहा था। इसके साथ ही धान खरीदी में लापरवाही, मनमानी और उदासीनता जैसे गंभीर मामले सामने आए है।
तत्काल प्रभाव से निलंबन
गंभीर लापरवाही और कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं देने पर—
- आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित छाल (पं.क्र. 615) के सहायक समिति प्रबंधक ठंडाराम बेहेरा को निलंबित किया गया।
- आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कोडासिया (पं.क्र. 833) के समिति प्रबंधक एवं फंड प्रभारी प्रहलाद बेहेरा को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।
- आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित खड़गांव (पं.क्र. 180) में धान उपार्जन केंद्र के नोडल अधिकारी के खिलाफ गाली-गलौज और धमकी की शिकायत सही पाए जाने पर सहायक समिति प्रबंधक कृपाराम राठिया को भी निलंबित किया गया।
वित्तीय प्रभार समाप्त
उप आयुक्त सहकारिता विभाग ने बताया कि—
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित जमरगिडी (पं.क्र. 1553) के सहायक समिति प्रबंधक एवं धान खरीदी प्रभारी दीनबंधु पटेल द्वारा बार-बार शासन निर्देशों की अवहेलना करने पर उनका वित्तीय प्रभार तत्काल समाप्त कर दिया गया। इसी तरह आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कापू (पं.क्र. 48) के सहायक समिति प्रबंधक श्यामनारायण दुबे का भी असंतोषजनक जवाब पाए जाने पर वित्तीय प्रभार समाप्त किया गया।

प्रशासनिक दिशा-निर्देश सख्त
छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) के अनुसार 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक संपूर्ण धान खरीदी अवधि में धान उपार्जन कार्य से जुड़े सभी कर्मचारियों पर आवश्यक सेवा संधारण एवं विघटन निवारण अधिनियम 1979 (ESMA) लागू रहेगा। जिला प्रशासन ने सभी समितियों को निर्देशित किया है कि धान खरीदी का कार्य पूरी पारदर्शिता और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचे।
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