
Chhattisgarh में फिर तेंदुए की मौत, Forest Department की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ में वन्यजीव सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। डोंगरगढ़ और खैरागढ़ के बीच स्थित वन क्षेत्र में शुक्रवार को एक और तेंदुए की मौत हो गई। ताजा मामला डोंगरगढ़ वन परिक्षेत्र के रानीगंज क्षेत्र का है, जहां तेंदुआ मृत अवस्था में मिला। लगातार हो रही तेंदुओं की मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर सवालिया निशान लगा दिया है।

वन विभाग के अनुसार, मृत तेंदुए का डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद दाह संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। विभाग का दावा है कि तेंदुए को आंतरिक चोटें (इंटरनल इंज्यूरी) थीं और उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। इस संबंध में डीएफओ आयुष जैन ने भी इसे प्राकृतिक मृत्यु बताया है। हालांकि, बिना विस्तृत जानकारी सार्वजनिक किए जल्दबाजी में की गई कार्रवाई ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मौत प्राकृतिक है, तो इसी डोंगरगढ़–खैरागढ़ बेल्ट में बार-बार तेंदुओं की मौत क्यों हो रही है? क्या यह महज संयोग है या फिर कमजोर गश्त, लचर निगरानी और समय पर कार्रवाई न होना इसकी वजह है?

हाईकोर्ट पहले ही ले चुका है संज्ञान
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहले ही तेंदुओं समेत अन्य वन्यजीवों की संदिग्ध मौतों पर संज्ञान ले चुका है। पूर्व मामलों में कोर्ट ने अवैध शिकार और वन्यजीव सुरक्षा में लापरवाही को लेकर वन विभाग से जवाब भी तलब किया था और पारदर्शी जांच के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है।
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