
भारत ने ईरान-इज़रायल युद्धविराम का स्वागत किया, क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता दोहराई
नई दिल्ली, 25 जून 2025:
भारत ने ईरान और इज़रायल के बीच 12 दिनों की शत्रुता के बाद हुए युद्धविराम का स्वागत किया है। साथ ही, पश्चिम एशिया में दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थिरता को लेकर अपनी गहरी चिंता दोहराई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस संघर्ष के नवीनतम घटनाक्रमों पर बारीकी से नज़र रखी है, जिसमें ईरान की परमाणु सुविधाओं पर अमेरिकी कार्रवाई और कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान की जवाबी कार्रवाई शामिल है।
युद्धविराम की शुरुआत
ईरानी सरकारी टेलीविज़न ने मंगलवार को घोषणा की कि युद्धविराम शुरू हो गया है।

इसके बाद, इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बयान में कहा कि उनका देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम पर सहमत है। इससे पहले, ईरान ने युद्धविराम की समय सीमा से ठीक पहले इज़रायल पर छह मिसाइलें दागी थीं। जवाब में, इज़रायल ने तेहरान के पास एक रडार प्रतिष्ठान को नष्ट कर दिया।
भारत की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “हम समग्र और सतत क्षेत्रीय सुरक्षा की संभावनाओं को लेकर गहरी चिंता में हैं, लेकिन हम ईरान और इज़रायल के बीच युद्धविराम और इसे लाने में अमेरिका व कतर की भूमिका का स्वागत करते हैं।” मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि क्षेत्रीय संघर्षों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर भारत का रुख
भारत, जिसके ईरान और इज़रायल दोनों के साथ घनिष्ठ रणनीतिक संबंध हैं, ने शुरू से ही दोनों देशों से संयम बरतने और वार्ता की ओर लौटने का आग्रह किया था। 13 जून को इज़रायली सैन्य हमलों के बाद शुरू हुई शत्रुता को भारत ने बढ़ती चिंता के साथ देखा। पश्चिम एशिया भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र तेल और गैस का प्रमुख स्रोत है और वहां 90 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी रहते हैं।
भारतीय नागरिकों की निकासी
शत्रुता के बीच, भारत ने ईरान और इज़रायल से लगभग 3,200 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला है।

ईरान में करीब 10,000 भारतीय, जिनमें कई छात्र शामिल हैं, और इज़रायल में 32,000 से अधिक भारतीय रहते हैं। भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता के ज़रिए अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।
कूटनीति पर जोर
विदेश मंत्रालय ने कहा, “भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए अपनी भूमिका निभाने को तैयार है। हम उम्मीद करते हैं कि सभी पक्ष स्थायी शांति की दिशा में काम करेंगे।” भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के उस बयान से भी खुद को अलग कर लिया, जिसमें इज़रायल के ईरान पर हमलों की निंदा की गई थी।
अमेरिका और कतर की भूमिका
युद्धविराम को सुनिश्चित करने में अमेरिका और कतर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने आगे के हमलों से परहेज करने का फैसला किया। भारत ने इस मध्यस्थता की सराहना की और क्षेत्रीय शांति के लिए कूटनीति को एकमात्र रास्ता बताया।
क्षेत्रीय स्थिति पर नज़र
विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम ईरान-इज़रायल संघर्ष से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर रातभर नज़र रख रहे हैं।” रविवार को ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर अमेरिकी कार्रवाई और कतर में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान की जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया था। भारत ने इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
मोदी-पेजेशकियन बातचीत
रविवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की। मोदी ने शत्रुता बढ़ने पर गहरी चिंता जताई और पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए बातचीत का आह्वान किया।
हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें 👇👇
https://chat.whatsapp.com/IJrppjHVVwT5Q6vKhLAfuT



