
सुप्रीम कोर्ट ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को बचाव नहीं माना, ब्लैक कैट कमांडो को दहेज हत्या के मामले मेआत्मसमर्पण का आदेश
नई दिल्ली, 24 जून 2025 — सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को दहेज हत्या के दोषी पर ऑपरेशन सिंदूर में सेवा का हवाला देकर आत्मसमर्पण से छूट देने की याचिका खारिज कर दी और आरोपी ब्लैक कैट कमांडो को दो सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
एक पीठ, जिसका नेतृत्व न्यायमूर्ति उज्जल भुईयां एवं न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन कर रहे थे, ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) में आत्मसमर्पण से छूट का आवेदन ठुकरा दिया। अभियुक्त बलजिंदर सिंह ने अदालत से कहा कि वह पिछले 20 वर्षों से ऑपरेशन सिंदूर मिशन में सक्रिय रहा और उसे ब्लैक कैट कमांडो के रूप में तैनात किया गया है, पर उच्चतम न्यायालय इस दलील से प्रभावित नहीं हुआ
न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की, “ऑपरेशन सिंदूर में आपकी सेवा आपको घर पर अपराध करने से अछूता नहीं रखती। इससे तो यह पता चलता है कि आप शारीरिक रूप से कितने फिट हैं, और उसी फिटनेस से आपने अपनी पत्नी का गला घोंटा।” न्यायमूर्ति ने रुख स्पष्ट किया कि “उच्च न्यायालय ने आपकी अपील खारिज कर दी है; आप यहां विशेष अनुमति याचिका पर हैं।” सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका की सुनवाई के लिए नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब माँगा तथा आत्मसमर्पण के लिए दो सप्ताह की मोहलत दी
मुकदमे का पृष्ठभूमि:
– जुलाई 2004 में अमृतसर की ट्रायल कोर्ट ने बलजिंदर सिंह को IPC की धारा 304B (दहेज हत्या) के तहत दोषी ठहराया। अभियोजन के मुताबिक 18 जुलाई 2002 को दो वर्षों में विवाहिता को चुनरी से गला घोंट कर हत्या की गई थी। घटना के समय मृतका के भाई और भाभी ने घरेलू उत्पीड़न की दृष्टि से मारपीट देखी थी
– ट्रायल कोर्ट ने चार सह-आरोपियों को बरी किया, लेकिन मुख्य आरोपी को दोषी ठहराया।
– मई 2025 में हाईकोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दस वर्ष की कठोर कारावास की सजा बरकरार रखी और जुर्माने को सिर्फ रद्द किया
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि गंभीर अपराधों में सेवा या बहादुरी का कथित रिकॉर्ड immunity नहीं बन सकता, तथा दोषी को नियत समय मे आत्मसमर्पण करना अनिवार्य होगा।
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