
डिजिटल अरेस्ट ठगी मामले में ED की बड़ी कार्रवाई: 5 राज्यों में 11 ठिकानों पर छापे, एक गिरफ्तार
नई दिल्ली/जालंधर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जालंधर जोनल टीम ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी करने वाले मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ईडी ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और असम में एक साथ 11 स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई लुधियाना के प्रसिद्ध उद्योगपति श्री एस. पी. ओसवाल के साथ हुई 7 करोड़ रुपए की ठगी से जुड़ी है।
एस. पी. ओसवाल से 7 करोड़ की ठगी
ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर फर्जी सरकारी और न्यायिक दस्तावेज दिखाए और ओसवाल को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 7 करोड़ रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए। इनमें से 5.24 करोड़ रुपए बरामद कर पीड़ित को वापस कर दिए गए। बाकी रकम म्यूल अकाउंट्स (मजदूरों, डिलीवरी बॉय आदि के नाम पर खोले खातों) में ट्रांसफर की गई, जहां से पैसा तुरंत निकाल लिया गया या आगे भेज दिया गया।

10 एफआईआर से जुड़ी जांच
ईडी ने लुधियाना साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। बाद में इसी गिरोह से जुड़े 9 अन्य मामले शामिल किए गए, जिनमें अलग-अलग राज्यों में डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी की शिकायतें थीं। कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत की गई।
छापों में बरामद हुए सबूत
पांच राज्यों के 11 ठिकानों पर एक साथ हुई तलाशी में कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य सबूत बरामद किए गए, जिन्हें जब्त कर लिया गया। जांच में ठगी की रकम को लेयरिंग करने का तरीका सामने आया है।
असम निवासी रूमी कलिता गिरफ्तार
ईडी ने इस मामले में असम निवासी रूमी कलिता को 23 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया। वह ठगी की रकम को म्यूल अकाउंट्स में डायवर्ट करने और लेयरिंग करने में मुख्य भूमिका निभा रहा था। बदले में उसे लॉन्ड्रिंग रकम का एक प्रतिशत मिलता था। गुवाहाटी कोर्ट ने 4 दिन का ट्रांजिट रिमांड दिया, फिर जालंधर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने 10 दिन की ईडी कस्टडी (2 जनवरी 2026 तक) दी।
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