
6 माह की गर्भवती रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति, High Court का अहम फैसला, पीड़िता को भविष्य तय करने का अधिकार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसले में 6 महीने की गर्भवती रेप पीड़िता को गर्भपात (अबॉर्शन) कराने की अनुमति दे दी है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि पीड़िता को अपने भविष्य के बारे में निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।
शीतकालीन अवकाश के दौरान हुई सुनवाई
यह मामला 22 दिसंबर को शीतकालीन अवकाश (विंटर वेकेशन) के दौरान हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए आया। जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मामले पर त्वरित सुनवाई की।
मेडिकल बोर्ड की राय के बाद अनुमति
कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और पीड़िता की मानसिक व शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए गर्भपात की अनुमति प्रदान की। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता को अनचाहे गर्भ को ढोने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

आरोपी के खिलाफ सबूत सुरक्षित रखने का निर्देश
हाईकोर्ट ने आरोपी को सजा दिलाने के उद्देश्य से भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में न्यायिक प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।
पीड़िता के अधिकारों को मिली प्राथमिकता
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि संविधान और कानून पीड़िता को सम्मानपूर्वक जीवन जीने और अपने शरीर से जुड़े फैसले स्वयं लेने का अधिकार देता है।
सामाजिक और कानूनी दृष्टि से अहम फैसला
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल पीड़िता के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि ऐसे संवेदनशील मामलों में न्यायपालिका की मानवीय सोच को भी दर्शाता है।
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