
रिव्यू पिटीशन खारिज, High Court की सख्त टिप्पणी, बार-बार याचिका दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग : कोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने विभागीय जांच में सजा पाए एक सरकारी कर्मचारी की रिव्यू पिटीशन को सख्त टिप्पणियों के साथ खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब किसी फैसले में कोई त्रुटि नहीं हो, तो केवल दोबारा सुनवाई के उद्देश्य से रिव्यू याचिका दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
अलग-अलग वकील बदलना गलत परंपरा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा अलग-अलग चरणों में अलग-अलग वकीलों को नियुक्त कर बार-बार याचिकाएं दाखिल करना बार की स्वस्थ और गरिमामयी परंपरा के खिलाफ है। इस प्रवृत्ति से न्यायिक व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।

50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया
कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मंशा को देखते हुए रिव्यू पिटीशन खारिज करने के साथ उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। न्यायालय ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायिक समय की बर्बादी हैं।
विभागीय जांच में दोषी पाया गया था कर्मचारी
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता संजीव कुमार यादव के खिलाफ विभागीय जांच की गई थी। जांच में दोषी पाए जाने पर उसे चार वेतनवृद्धियां रोकने की सजा दी गई थी।पहले भी सभी स्तरों पर मिल चुकी है हार
संजीव कुमार यादव ने इस सजा के खिलाफ पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में याचिका दायर की थी, जिसे जनवरी 2025 में खारिज कर दिया गया। इसके बाद डिवीजन बेंच में रिट अपील दाखिल की गई, जिसे मार्च 2025 में खारिज कर दिया गया।
इसके बाद याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अगस्त 2025 में उसकी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) भी खारिज हो गई।
फिर भी दाखिल की रिव्यू याचिका
सभी न्यायिक मंचों से निराशा मिलने के बावजूद याचिकाकर्ता ने एक बार फिर हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर कर दी, जिसे कोर्ट ने सख्त टिप्पणी के साथ खारिज कर दिया।
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