
फर्जी GST फर्मों का जाल बेनकाब, हजारों करोड़ के घोटाले की आशंका
रायपुर। फर्जी फर्मों के जरिए की जा रही GST चोरी और बोगस बिलिंग की रिपोर्टिंग का असर अब साफ नजर आने लगा है। “ना माल आया, ना माल बिका” के सिद्धांत पर चल रहे इस फर्जीवाड़े में करोड़ों रुपये का GST घोटाला सामने आ रहा है। इस तरह की धोखाधड़ी सिर्फ सामान्य व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि मेडिकल होलसेल मार्केट में भी यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
बिना माल के खरीद–फरोख्त, कागजों में करोड़ों का कारोबार
जानकारी के अनुसार, कई व्यापारी अपने कारोबार को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए बिना किसी वास्तविक माल के GST बिल की खरीद–बिक्री करते हैं। इससे उनकी टर्नओवर और रोलिंग कागजों में ज्यादा दिखाई जाती है, जिसके आधार पर वे बैंकों से आसानी से GST लोन हासिल कर लेते हैं।
GST की रकम सीधे व्यापारी की जेब में
इस फर्जी बिलिंग के जरिए जो GST वसूली जाती है, वह सरकार के खजाने में जमा होने की बजाय सीधे व्यापारी की जेब में चली जाती है। बाद में इस रकम को GST विभाग में जमा नहीं किया जाता, जिससे राजस्व को भारी नुकसान पहुंचता है।
कई राज्यों में फैला है गिरोह
अब जो मामला सामने आया है, वह एक संगठित गैंग से जुड़ा बताया जा रहा है। इस गिरोह का नेटवर्क छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार, अहमदाबाद, सूरत, पटना और मुंबई तक फैला हुआ है। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी इस पूरे नेटवर्क के केवल छोटे सदस्य बताए जा रहे हैं।

40 हजार करोड़ से अधिक के घोटाले की आशंका
सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला करीब 40 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का हो सकता है। इस घोटाले में लोहा, सीमेंट के बड़े व्यापारी और कुछ मेडिकल माफिया भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो दिन-रात फर्जी बिल बनाने और खरीदने का काम कर रहे हैं।
बड़े खुलासे के लिए सख्त जांच जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि GST विभाग इस मामले की गंभीरता से और बिना किसी राजनीतिक दबाव के जांच करता है, तो बड़े से बड़ा खुलासा सामने आ सकता है। इसके लिए बड़े पैमाने पर छापेमारी और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने की आवश्यकता है।
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