
Raipur : मोज़ो–मशरूम फैक्ट्री मामला, 28 दिन बाद भी FIR नहीं, जांच पर उठे सवाल
रायपुर के खरोरा स्थित मोज़ो मशरूम फैक्ट्री में सामने आए बाल श्रमिकों के शोषण के मामले को 28 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो FIR दर्ज हो पाई है और न ही ठोस कानूनी कार्रवाई शुरू हो सकी है। इस मामले में रेस्क्यू टीम के बयान दर्ज न होने से जांच की गति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रेस्क्यू टीम का बयान दर्ज नहीं
मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल जिम्मेदार अधिकारियों के बयान अब तक दर्ज नहीं हो सके हैं। इनके बिना जांच को आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा है, जिससे FIR दर्ज करने की प्रक्रिया भी अटकी हुई है।
104 बच्चों के रेस्क्यू का दावा
रेस्क्यू टीम के सीएसपीओ का दावा है कि फैक्ट्री से कुल 104 बच्चों का रेस्क्यू किया गया था। हालांकि, इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज और ठोस साक्ष्य अधिकारियों द्वारा मांगे गए हैं, जो अभी तक प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।

एफआईआर न होने से कार्रवाई ठप
28 दिन बीत जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज न होने के कारण आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है। इससे बाल श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और न्याय की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
जिम्मेदार एजेंसियों के बयान में विरोधाभास
एक ओर पुलिस का कहना है कि रेस्क्यू करने वाली एजेंसियों के अधिकारी बयान दर्ज कराने नहीं आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एनजीओ और रेस्क्यू से जुड़े जिम्मेदारों का दावा है कि वे रेस्क्यू के बाद थाने में आवेदन और दस्तावेज जमा कर चुके हैं। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

न्याय की राह में देरी
मोज़ो–मशरूम फैक्ट्री का यह मामला बाल श्रम और शोषण से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। ऐसे में जांच और एफआईआर में हो रही देरी न केवल पीड़ित बच्चों के साथ अन्याय है, बल्कि व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग कब तक आवश्यक बयान और साक्ष्य जुटाकर मामले में आगे की कार्रवाई करते हैं।
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