
बीएलओ की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पश्चिम बंगाल सरकार को जारी किया नोटिस
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि बीएलओ पर बढ़ते खतरे, धमकियों और कार्यभार को लेकर स्थिति चिंताजनक है। सुनवाई में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि कई नेता इस मुद्दे को लेकर अदालत का उपयोग “राजनीतिक हाईलाइटिंग” के मंच की तरह कर रहे हैं। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि धमकियों और हिंसा के कई मामलों के बावजूद अब तक सिर्फ एक एफआईआर दर्ज है, बाकी घटनाएं पुरानी बताई जा रही हैं।

35–40 बीएलओ ज्यादा काम से गंवा चुके अपनी जान
चुनाव आयोग के वकील ने भी अदालत के सामने बीएलओ की सुरक्षा और अतिरिक्त स्टाफ की जरूरत पर जोर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव से पहले पुलिस प्रशासन को सीधे चुनाव आयोग के अधीन देना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। गौरतलब है कि 4 दिसंबर को बीएलओ की मौत के मामले में दाखिल याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई थी। देशभर में अब तक लगभग 35–40 बीएलओ अत्यधिक कार्यभार और तनाव के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि जहां स्टाफ की कमी है, वहां तुरंत अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की जाए और दबाव में कार्य कर रहे अधिकारियों को वैकल्पिक स्टाफ उपलब्ध कराया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि बीएलओ की सुरक्षा, कम कार्य घंटे और बेहतर कार्यपरिस्थिति सुनिश्चित करना सरकारों की जिम्मेदारी है।
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