March 4, 2026
ऑपरेशन सिंधु: ईरान से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी का अभियान

ऑपरेशन सिंधु: ईरान से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी का अभियान

Jun 21, 2025

नई दिल्ली: भारत सरकार ने ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों, विशेष रूप से छात्रों, को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए ऑपरेशन सिंधु शुरू किया है। इस अभियान के तहत सैकड़ों भारतीय नागरिकों को ईरान से निकाला गया है, जिसमें अधिकांश जम्मू और कश्मीर के छात्र शामिल हैं। भारत सरकार इस अभियान का पूरा खर्च वहन कर रही है, जिससे नागरिकों को बिना किसी वित्तीय बोझ के सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हो रही है।

ऑपरेशन सिंधु क्या है?

ऑपरेशन सिंधु भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक विशेष राहत अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान में चल रहे इजराइल-ईरान संघर्ष के कारण वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाना है।

इस अभियान के पहले चरण में 17 जून, 2025 को 110 भारतीय छात्रों को उत्तरी ईरान से सड़क मार्ग के माध्यम से आर्मेनिया ले जाया गया। इसके बाद, 18 जून को येरेवन, आर्मेनिया से एक विशेष उड़ान के जरिए ये छात्र दिल्ली पहुंचे।

क्यों शुरू हुआ ऑपरेशन सिंधु?

इजराइल और ईरान के बीच 13 जून, 2025 से शुरू हुए सैन्य संघर्ष ने ईरान में हालात को अस्थिर कर दिया है। इस संघर्ष में मिसाइल हमले और हवाई हमलों के कारण ईरान में रह रहे लगभग 4,000 भारतीय नागरिकों, जिनमें से आधे से अधिक छात्र हैं, की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंधु की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य भारतीय नागरिकों को युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर ले जाना और फिर भारत वापस लाना है।

मशहद से 290 छात्रों की वापसी

20 जून, 2025 को देर रात मशहद, ईरान से 290 भारतीय छात्रों, जिनमें से अधिकांश जम्मू और कश्मीर के थे, को लेकर एक विशेष चार्टर्ड उड़ान दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरी।

इस उड़ान को महान एयर द्वारा संचालित किया गया और इसे विदेश मंत्रालय के सचिव (सीपीवी और ओआईए) अरुण कुमार चटर्जी ने प्राप्त किया। जम्मू और कश्मीर छात्र संघ ने इस सफल निकासी के लिए भारत सरकार और विदेश मंत्रालय को धन्यवाद दिया, जिन्होंने परिवारों को उनके प्रियजनों की सुरक्षित वापसी का आश्वासन दिया।

तुर्कमेनिस्तान के रास्ते 517 भारतीयों की वापसी

ऑपरेशन सिंधु के तहत अब तक 517 भारतीय नागरिक स्वदेश लौट चुके हैं। तुर्कमेनिस्तान के अश्गाबात से एक विशेष उड़ान के जरिए भारतीयों को भारत लाया गया।

शनिवार, 21 जून को सुबह 10 बजे एक और उड़ान दिल्ली पहुंचने वाली है, जबकि तीसरी उड़ान मशहद से शनिवार शाम को आने की उम्मीद है। इन उड़ानों के जरिए कुल मिलाकर लगभग 1,000 भारतीय नागरिकों को वापस लाया जाएगा।

भारत सरकार का पूरा खर्च वहन

भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंधु के तहत सभी निकासी प्रक्रियाओं का पूरा खर्च वहन करने का फैसला किया है। चार्टर्ड उड़ानों, सड़क मार्ग से परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए सरकार ने कोई कमी नहीं छोड़ी है। विदेश मंत्रालय ने 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जो भारतीय नागरिकों को सहायता प्रदान करने के लिए दिन-रात काम कर रहा है।

ईरान और आर्मेनिया का सहयोग

ऑपरेशन सिंधु की सफलता में ईरान और आर्मेनिया सरकारों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। ईरान ने अपनी हवाई सीमा को विशेष रूप से भारतीय निकासी उड़ानों के लिए खोला, जिससे यह प्रक्रिया सुगम हो सकी।

ईरानी दूतावास के उप-प्रमुख मोहम्मद जवाद होसैनी ने कहा, “हम भारतीयों को अपने लोगों की तरह मानते हैं। उनकी सुरक्षित निकासी के लिए हम हर संभव सहायता दे रहे हैं।”

छात्रों का अनुभव

दिल्ली पहुंचे छात्रों ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि वे युद्ध जैसे हालात में डर के साये में जी रहे थे। उर्मिया विश्वविद्यालय के एक छात्र यासिर गफ्फार ने बताया, “हमने मिसाइलों को पास से गुजरते देखा और रात में जोरदार आवाजें सुनीं। भारत सरकार की मदद से हम सुरक्षित घर पहुंचे।” एक अन्य छात्रा मारियम रोज ने कहा, “भारतीय दूतावास ने सब कुछ पहले से तैयार कर रखा था, हमें कोई परेशानी नहीं हुई।”

ऑपरेशन सिंधु की निरंतरता

ऑपरेशन सिंधु अभी भी जारी है, और भारत सरकार ने इजराइल में फंसे भारतीय नागरिकों को भी निकालने का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय ने तेल अवीव में भारतीय दूतावास को इसकी व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।

भारत का संदेश

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। ऑपरेशन सिंधु इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जो भारतीय हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति हमेशा खुली है।यह अभियान न केवल भारत की त्वरित और मानवीय प्रतिक्रिया को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की अपने नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है।

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