
मुठभेड़ में मारी गई महिला माओवादी शांति उर्फ देवे, 8 लाख की इनामी माओवादी
कांकेर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के आमाटोला-कलपर जंगल क्षेत्र में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक महिला माओवादी मारी गई। मृतक की पहचान पीएलजीए की सक्रिय सदस्य शांति उर्फ देवे के रूप में हुई है, जिस पर सरकार ने ₹8 लाख का इनाम घोषित किया था। इस ऑपरेशन में हथियार, माओवादी साहित्य और अन्य सामग्री भी बरामद की गई है। बस्तर रेंज में पिछले 18 महीनों में 412 नक्सली या तो मारे गए या गिरफ्तार किए गए हैं।
मुठभेड़ का विवरण
20 जून को कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के आमाटोला और कलपर के बीच कोटरी नदी के पार जंगल और पहाड़ी इलाके में यह मुठभेड़ हुई। जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की संयुक्त टीम ने विश्वसनीय सूचना के आधार पर ऑपरेशन शुरू किया था। कांकेर की पुलिस अधीक्षक (SP) इंदिरा कल्याण एलेसेला ने बताया कि सुरक्षा बलों ने घेराबंदी की, जिसके बाद माओवादियों के साथ आमना-सामना हुआ। इस दौरान एक महिला माओवादी मारी गई, जिसकी बाद में पहचान शांति उर्फ देवे के रूप में हुई।
शांति उर्फ देवे का माओवादी इतिहास
शांति उर्फ देवे, मूल रूप से बीजापुर जिले के गुंडेम की रहने वाली थी। वह पहले गरियाबंद जिले की गोबरा एरिया कमेटी में सक्रिय थी और बाद में उत्तर बस्तर डिवीजन में काम करने लगी। वह पीएलजीए की कंपनी नंबर 5 और कंपनी नंबर 7 के साथ जुड़ी थी। प्रतिबंधित सीपीआई माओवादी संगठन में उसकी वरिष्ठ कैडर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका थी। उसकी खतरनाक गतिविधियों को देखते हुए सरकार ने उस पर ₹8 लाख का इनाम रखा था।
घटनास्थल से बरामद सामग्री

मुठभेड़ स्थल से सुरक्षा बलों ने एक .303 रायफल, एक देसी बीजीएल लॉन्चर, सात जिंदा गोलियां, एक वॉकी-टॉकी सेट, दो पिट्ठू बैग, दो मोबाइल चार्जर, बैटरियां, माओवादी दस्तावेज, प्राथमिक चिकित्सा किट और दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद कीं। यह सामग्री माओवादियों की सक्रियता और उनकी योजनाओं को दर्शाती है।
सुरक्षा बलों की सफलता
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम ने इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा, “दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी हिंसा की जड़ें कमजोर पड़ रही हैं। नागरिकों की सुरक्षा और भयमुक्त वातावरण के लिए सुरक्षा बल पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं।” उन्होंने माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील भी की।
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