
Bilaspur High Court: शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाने के आरोप में युवक बरी — कोर्ट ने कहा, लिव-इन संबंध ‘सहमति’ पर आधारित था
पीड़िता का आरोप: शादी का वादा कर बनाए शारीरिक संबंध
रायगढ़ जिले की एक युवती ने 10 फरवरी 2016 को थाने में लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि आरोपी 1 फरवरी 2016 से उसके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में था। इस दौरान आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर बार-बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जब युवती ने शादी के लिए दबाव डाला, तो आरोपी ने इनकार कर दिया।
पीड़िता की रिपोर्ट के आधार पर आरोपी के खिलाफ धारा 376 (बलात्कार) और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराया और मामले की जांच आगे बढ़ाई।

हाईकोर्ट ने किया आरोपों का परीक्षण — संबंध थे “आपसी सहमति” से
मामला बिलासपुर हाईकोर्ट में पहुंचा, जहां दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तृत जांच की गई। कोर्ट ने माना कि पीड़िता और आरोपी लंबे समय तक लिव-इन पार्टनर के रूप में एक साथ रह रहे थे और उनका संबंध आपसी सहमति पर आधारित प्रतीत होता है।
अदालत ने यह भी कहा कि पीड़िता बालिग थी और उसने अपनी स्वतंत्र इच्छा से आरोपी के साथ रहना स्वीकार किया था। केवल शादी न होने की निराशा को बाद में “झूठे वादे” के रूप में नहीं देखा जा सकता।
पॉक्सो एक्ट की धाराएँ भी लागू नहीं — अदालत ने बताया कारण
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि घटना के समय पीड़िता प्राप्तवयस्क (बालिग) थी, इसलिए POCSO Act की धाराएँ तकनीकी रूप से लागू नहीं होतीं। इस आधार पर भी कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलील को कमजोर माना।
साक्ष्य अपर्याप्त — युवक को किया गया बरी
कोर्ट ने पाया कि शादी से इनकार को धोखाधड़ी या आपराधिक कृत्य सिद्ध करने वाले पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। यह मानते हुए कि संबंध स्वैच्छिक थे और आरोप सिद्ध नहीं हो पाए, हाईकोर्ट ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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