दंतेवाड़ा जिले के बचेली शहर की सरकारी शराब दुकान में 1.69 करोड़ रुपए के बड़े गबन का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में आबकारी दारोगा अजय शर्मा सहित पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, शराब दुकानों में फर्जीवाड़े का एक नया तरीका उजागर हो रहा है।
कैसे हुआ करोड़ों का गबन
बचेली की जिस शराब दुकान में यह गड़बड़ी पकड़ी गई, वहां रोजाना लगभग एक लाख रुपए की अवैध कमाई प्लेसमेंट कंपनी के कर्मचारियों और आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर के बीच बांटी जाती थी। दुकान में शराब की बिक्री तो होती थी, लेकिन सरकारी सिस्टम में स्टॉक ‘पूरा’ दिखाया जाता था।
होलोग्राम की फोटो से होता था ऑडिट
शराब की हर बोतल पर एक यूनिक होलोग्राम लगा होता है, जिसकी फोटो लेकर सर्वर पर अपडेट किया जाता है ताकि स्टॉक और बिक्री में पारदर्शिता बनी रहे।
लेकिन इस गिरोह ने इसी सिस्टम को हथियार बनाकर धोखाधड़ी की:
•असली बोतलें बेच दी जाती थीं।
•उन बोतलों के होलोग्राम की पहले से खींची गईं तस्वीरें सर्वर में अपलोड कर दी जाती थीं।
•सर्वर में स्टॉक पूरा दिखता था, जबकि वास्तविक स्टॉक कम होता जाता था।
यही वजह थी कि लंबे समय तक यह फर्जीवाड़ा पकड़ में नहीं आया।
पाँच आरोपित गिरफ्तार, जांच जारी
पुलिस ने अब तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है और सिस्टम की तकनीकी जांच भी शुरू कर दी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह जाल कितना बड़ा था और क्या अन्य दुकानों में भी इसी तरह का खेल चल रहा है।
सरकारी सिस्टम में बड़ी खामी उजागर
यह मामला शराब दुकानों के डिजिटल ऑडिट सिस्टम की एक बड़ी खामी को उजागर करता है, जहां सिर्फ होलोग्राम की तस्वीरों के आधार पर स्टॉक मिलान किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाइव स्कैनिंग या रियल-टाइम ट्रैकिंग होती, तो इतना बड़ा गबन संभव नहीं था।
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