
Raipur : धोखाधड़ी का पैसा आने से व्यापारियों और लोगों के खाते सीज
रायपुर। ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका असर अब उन निर्दोष लोगों पर भी पड़ने लगा है, जिनके खातों में ठगों द्वारा भेजा हुआ रकम गलती से या योजना के तहत ट्रांसफर हो जाता है। पुलिस और बैंक संदिग्ध लेनदेन मिलने पर ऐसे खातों को तुरंत सीज कर देते हैं। अकेले रायपुर में ऐसे 50 से अधिक खाते सीज होने के मामले सामने आए हैं, जिनमें व्यापारी, नौकरीपेशा और आम लोग शामिल हैं।

संदिग्ध रकम आने पर बैंक करते हैं तुरंत कार्रवाई
बैंकों की साइबर सुरक्षा प्रणाली किसी भी अनियमित ट्रांजैक्शन पर अलर्ट हो जाती है। जब किसी ग्राहक के खाते में अज्ञात स्रोत से रकम आती है और दूसरी ओर कोई ऑनलाइन फ्रॉड पीड़ित शिकायत दर्ज कराता है, तो बैंक खाते को तुरंत ब्लॉक कर देता है ताकि रकम आगे कहीं ट्रांसफर न हो सके। बैंक अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया कानूनन जरूरी है लेकिन इससे निर्दोष लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बेरोक ट्रांजैक्शन बनने लगा मुसीबत का कारण
कई पीड़ितों ने बताया कि उनके खाते में अचानक पैसे आए, जिसकी उन्हें जानकारी तक नहीं थी। बाद में पता चला कि साइबर ठगों ने किसी और व्यक्ति को ठगकर रकम उनके खाते में डाल दी थी। अब ऐसी स्थिति में न तो खाता धारक पैसे निकाल पा रहा है और न ही अपना खाता सामान्य रूप से चला पा रहा है।
पीड़ितों को बैंक–थाने–कोर्ट के चक्कर
खाते सीज होने के बाद पीड़ितों को पहले बैंक में शिकायत दर्ज करनी होती है, जहां से उन्हें थाने भेज दिया जाता है। पुलिस सत्यापन के बाद केस क्लियर करती है, लेकिन कुछ मामलों में दस्तावेज़ और बयान कोर्ट में भी जमा करवाने पड़ते हैं। इस लंबी प्रक्रिया के कारण कई लोग महीनों तक अपना खाता उपयोग नहीं कर पाते।
साइबर सेल ने जारी की एडवाइजरी
साइबर विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि—
•किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर खाता, ई-वॉलेट या यूपीआई आईडी का उपयोग न करने दें।
•कोई रकम गलती से आए तो तुरंत बैंक और साइबर सेल को सूचना दें।
•संदिग्ध कॉल, लिंक या ऑफरों से बचें।
साथ ही, पुलिस का कहना है कि जिन लोगों के खातों में गलत तरीके से पैसा ट्रांसफर हुआ है, वे जांच में सहयोग करें, ताकि उन्हें जल्द राहत दी जा सके।
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