
अमित शाह के भतीजे बनकर 3.9 करोड़ की ठगी के आरोप में जेल में बंद व्यक्ति को Supreme Court ने जमानत दी
नई दिल्ली, 3 दिसंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने अमित शाह के भतीजे बनकर एक व्यवसायी से 3.9 करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोप में चार साल से अधिक समय से जेल में बंद आरोपी अजय कुमार नैय्यर को जमानत दे दी है। जस्टिस जे.के. महेश्वरी और विजय विश्वोई की बेंच ने 2 दिसंबर 2025 को यह फैसला सुनाया, जिसमें लंबे समय से चल रहे मुकदमे की धीमी गति और आरोपी द्वारा कथित अधिकतम सजा के बराबर समय काटने को आधार बनाया गया। यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में देरी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संकेत है।
ठगी की साजिश: अमित शाह के भतीजे का झूठा दावा
मामला दिसंबर 2021 से जुड़ा है, जब आरोपी अजय कुमार नैय्यर ने खुद को ‘अजय शाह’ बताकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भतीजा होने का दावा किया। उन्होंने जालंधर जिमखाना क्लब में एक पारिवारिक परिचित के माध्यम से एक व्यवसायी से मुलाकात की। नैय्यर ने राष्ट्रीय स्मारक नवीनीकरण के लिए राष्ट्रपति भवन को चमड़े की आपूर्ति का 90 करोड़ रुपये का सरकारी टेंडर हासिल करने का लालच दिया। उन्होंने 90 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट दिखाया और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 2.5 करोड़ रुपये मांगे। धीरे-धीरे व्यवसायी ने नकद और आरटीजीएस के माध्यम से कुल 3.9 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। बाद में, नैय्यर ने टेंडर मूल्य बढ़कर 127 करोड़ रुपये होने का झूठा दावा करते हुए एक और डिमांड ड्राफ्ट दिखाया।

गिरफ्तारी और मुकदमे की प्रक्रिया
ठगी का शक होने पर व्यवसायी ने दिसंबर 2021 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद नैय्यर को गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर आईपीसी की धारा 419 (धोखाधड़ी के लिए धोखा), 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 34 (साझा इरादा) के तहत मुकदमा चल रहा है। कुल 34 गवाहों के बयान दर्ज हैं, लेकिन 2022 में आरोप तय होने के बाद भी तीन साल बाद केवल पहले गवाह का क्रॉस-एग्जामिनेशन ही बाकी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 1 सितंबर को जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें गंभीर आरोपों और आरोपी के आपराधिक इतिहास का हवाला दिया गया था। अभियोजन पक्ष ने भी जमानत का विरोध किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: लंबी हिरासत को अनुचित ठहराया
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने फैसले में कहा कि आरोपी पर लगे आरोपों की अधिकतम सजा सात वर्ष है, और उन्होंने पहले ही चार वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं। मुकदमे की प्रगति बेहद धीमी है, और इसका पूरा होना अभी लंबा समय लेगा। अदालत ने लंबी हिरासत को न्यायोचित नहीं माना। दिल्ली सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने विरोध जताया, लेकिन अदालत ने आरोपी के तर्क को सही ठहराया कि मुकदमा जल्द समाप्त होने की संभावना नहीं है। जमानत पर रिहा होने के बाद नैय्यर को मुकदमे में पेश होने की शर्तें पूरी करनी होंगी।
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