
संचार साथी ऐप पर बवाल: ‘जबरदस्ती नहीं, चाहें तो डिलीट करें’—सरकार ने जासूसी के आरोपों को किया खारिज
नई दिल्ली : दूरसंचार विभाग द्वारा मोबाइल फोन में संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल करने के निर्देश पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इसे नागरिकों की जासूसी करने की कोशिश बताया, वहीं सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि यह ऐप अनिवार्य नहीं होगा बल्कि पूरी तरह वैकल्पिक रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई इसे इस्तेमाल नहीं करना चाहता, तो वह इसे न रजिस्टर करे और चाहें तो फोन से डिलीट भी कर सकता है।
इसे रखना या हटाना पूरी तरह उपभोक्ता की पसंद
सिंधिया ने कहा, “यह ग्राहकों की सुरक्षा का मामला है। देश में कई लोग नहीं जानते कि उनके पास फ्रॉड से बचाने वाला एक ऐप मौजूद है। इसलिए जागरूकता बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। लेकिन इसे रखना या हटाना पूरी तरह उपभोक्ता की पसंद है।”
कांग्रेस ने बताया स्नूपिंग ऐप
वहीं विपक्ष ने इस ऐप को लेकर सरकार पर जोरदार हमला बोला। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इसे “स्नूपिंग ऐप” बताया और नागरिकों की प्राइवेसी का उल्लंघन कहा। कार्ति चिदंबरम ने सरकार की तुलना रूस और नॉर्थ कोरिया की नीतियों से की।

90 दिन की डेडलाइन
DoT ने मोबाइल कंपनियों को ऐप प्री-इंस्टॉल करने के लिए 90 दिन की डेडलाइन दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि यह कदम केवल साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है, न कि निगरानी के लिए। मामले को लेकर राजनीति अभी और गर्म होने की उम्मीद है।
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