
सोशल मीडिया और OTT पर आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, केंद्र सरकार से 4 हफ्तों में जवाब तलब
नई दिल्ली: सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म पर बढ़ते आपत्तिजनक व अशोभनीय कंटेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सख्त रुख अपनाते हुए चार हफ्तों में विस्तृत जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि आज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसा कंटेंट बिना अनुमति और बिना चाहत के भी यूज़र्स के सामने आ जाता है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि “फोन ऑन करते ही कई बार ऐसा कंटेंट सामने आ जाता है जिसे देखने की आपकी इच्छा नहीं होती, लेकिन वह आप पर थोप दिया जाता है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री सिर्फ वीडियो में नहीं, बल्कि किताबों, पेंटिंग और नीलामी जैसी जगहों पर भी हो सकती है—और सभी पर नियमन आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस ने कही ये बात
जस्टिस जयमाला बागची ने कहा कि ऐसा कंटेंट देखकर कोई भी चौंक सकता है, इसलिए स्पष्ट चेतावनी देना अनिवार्य है। Bench ने सुझाव दिया कि देखने से पहले उम्र सत्यापन जैसे नियम लागू किए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि एक विशेषज्ञ समिति बनाई जा सकती है, जिसमें न्यायपालिका और मीडिया जगत के लोग शामिल हों। अदालत ने कहा कि उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि “एक ज़िम्मेदार समाज का निर्माण” है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने हाल के ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि 48 घंटे बाद किसी कंटेंट को हटाना व्यर्थ है, क्योंकि तब तक वह वायरल हो चुका होता है। कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में कंटेंट मैनेजमेंट और तेज़ी से संभव है, इसलिए उसके लिए ठोस नियम बनने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि यूज़र-जनित सामग्री, सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म के कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाने पर चार हफ्तों में रिपोर्ट पेश की जाए।
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