
कोरबा गैंगरेप और मर्डर केस: पांचों आरोपियों की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, जानिए क्या है पूरा मामला
कोरबा, 19 जून 2025:
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हुए दिल दहला देने वाले गैंगरेप और तिहरे हत्याकांड के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। इस मामले में पांचों दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया है। यह मामला जनवरी 2021 को कोरबा के लेमरू थाना क्षेत्र में हुआ था, जिसमें 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप और उसके पिता व चार साल की भतीजी की हत्या का जघन्य अपराध शामिल था।
अपराध की भयावहता
जनवरी 2021 को कोरबा के लेमरू थाना क्षेत्र में पहाड़ी कोरवा समुदाय की एक नाबालिग लड़की के साथ पांच आरोपियों—संतराम मझवार (49), अब्दुल जब्बार (34), अनिल कुमार सारथी (24), परदेशी राम (39), और आनंद राम पनिका (29)—ने गैंगरेप किया था।
इसके बाद, अपराध को छिपाने के लिए उन्होंने नाबालिग, उसके पिता और चार साल की भतीजी की निर्मम हत्या कर दी थी। इस जघन्य अपराध के लिए कोरबा के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 21 जनवरी 2025 को पांचों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि छठे आरोपी उमाशंकर यादव (26) को उम्रकैद की सजा दी गई थी।
हाईकोर्ट का फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में अपील की सुनवाई की। कोर्ट ने दोषियों की उम्र और मामले की परिस्थितियों का गहन विश्लेषण करने के बाद यह माना कि यह मामला ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में नहीं आता।

इसलिए, फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मृत्युदंड देना इस मामले में उचित नहीं होगा, और दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी जानी चाहिए।
अपराध की पृष्ठभूमि
यह मामला संतराम मझवार और पीड़ित परिवार के बीच पैसे के लेन-देन को लेकर हुए विवाद से शुरू हुआ था। संतराम को पीड़ित परिवार को मवेशी चराने के लिए प्रति माह 10 किलो चावल और सालाना 8,000 रुपये देने थे, लेकिन वह केवल 6,000 रुपये देता था। जब पीड़ित परिवार ने बकाया राशि मांगी और काम छोड़कर अपने गांव सतरेंगा लौटने का फैसला किया, तो संतराम और उसके साथियों ने योजनाबद्ध तरीके से इस अपराध को अंजाम दिया। उन्होंने पीड़ित परिवार को बस स्टैंड से बाइक पर अपने साथ ले जाकर शराब पिलाई, फिर नाबालिग के साथ गैंगरेप किया और तीनों की हत्या कर दी।
कानूनी प्रक्रिया
कोरबा के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस मामले में 208 पेज के अपने फैसले में पांचों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 376(2)(जी) (गैंगरेप), एससी-एसटी एक्ट, और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया था। विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार मिश्रा ने इस मामले में पैरवी की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस सजा को उम्रकैद में बदलते हुए यह स्पष्ट किया कि दोषी अपनी पूरी जिंदगी जेल में बिताएंगे।
हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें 👇👇
https://chat.whatsapp.com/IJrppjHVVwT5Q6vKhLAfuT



