
खैरागढ़ में दूषित पानी से हाहाकार: एक मौत के बाद भी नहीं चेते अफसर, अब दूसरे गांव में 50 से ज्यादा लोग बीमार
खैरागढ़ । खैरागढ़ क्षेत्र में दूषित पेयजल संकट अब जानलेवा रूप ले चुका है। लिमउटोला में 37 वर्षीय समारू गोंड की मौत को एक महीना बीत चुका है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नींद अब भी नहीं खुली। नतीजा यह कि अब नया करेला गांव में दूषित पानी पीने से 50 से अधिक लोग उल्टी-दस्त और डायरिया की चपेट में आ गए हैं। 5 गंभीर मरीजों को राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ा है।

पाइपलाइन से घरों तक पहुंचा ज़हर
लिमउटोला में मौत के बाद ग्रामीणों ने बार-बार पीएचई विभाग और पंचायत को लीकेज पाइपलाइन, गंदे नाले के संपर्क और दूषित जल प्रवाह की शिकायत की थी। लेकिन विभाग की सुस्ती ने हालात और भी खराब कर दिए। नया करेला गांव में पाइपलाइन कई जगह नालियों के बिल्कुल पास से गुजरती है। लीकेज होने पर गंदा पानी सीधे सप्लाई लाइन में घुसता रहा, और ग्रामीण वही पानी पीने को मजबूर थे।
ग्रामीणों का दर्द—
“पहले एक मौत हुई, फिर भी विभाग सोता रहा… अगर तब कार्रवाई होती तो आज पूरा गांव बीमार नहीं पड़ता।”

स्वास्थ्य विभाग ने लगाया आपातकालीन शिविर
23 नवंबर से मरीजों की संख्या बढ़ती देख स्वास्थ्य विभाग को गांव में आपात चिकित्सा शिविर लगाना पड़ा। खैरागढ़ विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक सेन ने बताया मॉर्निंग, ईवनिंग और नाइट—तीनों शिफ्ट में मेडिकल टीमें तैनात मरीजों के लगातार बढ़ने पर निगरानी तेज कर दी गई है । 5 गंभीर मरीज राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया ।

अब जागा पीएचई
पीएचई विभाग ने अब पानी के सैंपल लेकर जांच शुरू की है और पाइपलाइन की मरम्मत की जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल वही, क्या विभाग हर बार तब जागेगा जब स्थिति अस्पताल तक पहुंच जाएगी? समारू गोंड की मौत चेतावनी थी, नया करेला में 50 लोग बीमार दूसरी। अगर इससे भी सिस्टम नहीं चेता, तो अगली चेतावनी और घातक हो सकती है।

ग्रामीणों का सवाल—“कब मिलेगा साफ पानी?”
खैरागढ़ के ग्रामीण एक ही बात पूछ रहे हैं “कब तक दूषित पानी पीकर अपनी जान दांव पर लगाते रहेंगे? प्रशासन की चुप्पी और विभागों की लापरवाही ने संकट और भी गहरा कर दिया है।
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