
पत्नी द्वारा की गई क्रूरता साबित, हाईकोर्ट ने पलटा फैमिली कोर्ट का फैसला; पति की अपील मंजूर, 25 लाख रुपये देने का आदेश
बिलासपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुर्ग फैमिली कोर्ट के फैसले को पलटते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच — जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद — ने पति की अपील स्वीकार करते हुए पत्नी के खिलाफ क्रूरता के आरोपों को सही माना है। अदालत ने आदेश दिया कि पत्नी पति को एकमुश्त 25 लाख रुपये गुजारा भत्ता के रूप में देगी।
2014 से अलग रह रहा था दंपती, रिश्ता टूट चुका: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष वर्ष 2014 से अलग रह रहे हैं और अब वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुके हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि वर्तमान परिस्थितियों में शादी को बचाने की गुंजाइश नहीं है। सालों से चल रहे विवाद, झगड़े और आरोप-प्रत्यारोप ने संबंधों को अस्थिर कर दिया है।

पत्नी द्वारा झूठे आरोप, गर्भपात और बच्चे से दुर्व्यवहार को माना क्रूरता
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पत्नी द्वारा बार-बार झूठे आरोप लगाना, बिना परामर्श के गर्भपात कराना और बच्चे के साथ दुर्व्यवहार जैसी घटनाएँ मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आती हैं। इन आधारों पर पति की अपील को न्यायोचित मानते हुए उसे राहत प्रदान की गई।
दुर्ग निवासी दंपती की हुई थी 2009 में शादी
मामले के अनुसार, दंपती की शादी 4 मार्च 2009 को भिलाई के साईं मंगलम भवन में हुई थी। उनका एक बेटा भी है। वर्षों से चली आ रही वैवाहिक कलह के कारण मामला फैमिली कोर्ट तक पहुंचा था, जहां प्रारंभिक निर्णय पत्नी के पक्ष में गया था।
अदालत के आदेश से मामले का निपटारा
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए पत्नी पर एकमुश्त गुजारा भत्ता देने का निर्देश देकर मामले का अंतिम निपटारा कर दिया है। अदालत ने माना कि लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध और क्रूरता के प्रमाण तलाक एवं गुजारा भत्ते के लिए पर्याप्त आधार हैं।
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