
Raigarh में नाबालिग से दुष्कर्म: पड़ोसी ने बहला-फुसलाकर भगाया, 20 साल की सजा
रायगढ़, 23 नवंबर 2025: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के जोबी चौकी क्षेत्र में एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था, जिसमें आरोपी पड़ोसी ने उसे शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाया और बिलासपुर ले जाकर कई दिनों तक शारीरिक शोषण किया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र साहू ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही 8 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह सजा POCSO एक्ट के तहत दी गई है, जो नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में सख्ती का उदाहरण है।
घटना का विवरण: रात में घर से गायब हुई नाबालिग
यह घटना 14 मई 2024 की रात की है। पीड़िता नाबालिग लड़की ने रात करीब 11 बजे भोजन करने के बाद अपने कमरे में सोने चली गई थी। अगली सुबह यानी 15 मई को सुबह 6 बजे जब परिजनों ने देखा तो वह घर में मौजूद नहीं थी और उसके कपड़े भी गायब थे। घबराए परिवार ने रिश्तेदारों के यहां तलाश की, लेकिन कहीं सुराग नहीं मिला। पिता को शक हुआ कि कोई उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया है। इसके बाद उन्होंने तत्काल जोबी चौकी थाने में अज्ञात आरोपी के खिलाफ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

आरोपी का अपराध: शादी का लालच देकर बिलासपुर ले गया
जांच के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपी लक्ष्मण दास महंत, जो पीड़िता का पड़ोसी है, ने करीब एक साल से लड़की को शादी का प्रस्ताव दे रहा था। लड़की ने उसे अपनी नाबालिग होने की जानकारी दी थी, लेकिन आरोपी ने इसकी परवाह नहीं की। 14 मई की रात वह चुपके से घर में घुसा और लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। आरोपी ने उसे बाइक पर बिठाकर बिलासपुर पहुंचाया और वहां मजदूर कॉलोनी में किराए के मकान में रखा। 14 मई से 20 मई तक आरोपी ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया, साथ ही मारपीट भी की। 21 मई को आरोपी उसे गांव वापस लाया और छोड़ दिया।
पुलिस जांच और गिरफ्तारी: पीड़िता के बयान पर एक्शन
21 मई 2024 को पीड़िता को बरामद किया गया। महिला पुलिस अधिकारी के समक्ष उसने पूरी घटना बयान दी। इसके आधार पर पुलिस ने आरोपी लक्ष्मण दास महंत को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक अज्ञात आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले में POCSO एक्ट की धारा 366, 376, 2(न) और 323 जोड़ दी गईं। शासन की ओर से लोक अभियोजक मोहन सिंह ठाकुर ने मामले की पैरवी की। पुलिस ने सभी साक्ष्यों को मजबूती से इकट्ठा किया, जिससे अदालत में आरोपी के खिलाफ मजबूत केस बना।
अदालत का फैसला: 20 साल जेल और जुर्माना
POCSO कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के तर्क सुने गए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र साहू ने आरोपी को सभी धाराओं में दोषी पाया। कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि नाबालिगों के खिलाफ ऐसे अपराध समाज के लिए कलंक हैं और इन्हें कठोरता से दंडित किया जाना चाहिए। आरोपी को 20 वर्ष की सजा के साथ 8 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त जेल की सजा का प्रावधान है।
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