March 4, 2026
आदिवासी गांवों की तरक्की को अब मिलेगी नई रफ्तार, दंतेवाड़ा में शुरू हो रही कोल्ड स्टोरेज की सुविधा, किसानों को भी होगा लाभ

आदिवासी गांवों की तरक्की को अब मिलेगी नई रफ्तार, दंतेवाड़ा में शुरू हो रही कोल्ड स्टोरेज की सुविधा, किसानों को भी होगा लाभ

Jun 18, 2025

18, जून 2025

दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़: दंतेवाड़ा जिले के आदिवासी गांवों में विकास की एक नई लहर शुरू होने वाली है। यहां एक आधुनिक कोल्ड स्टोरेज सुविधा की शुरुआत की जा रही है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। इस परियोजना से आदिवासी समुदाय के लोगों को बेहतर आजीविका के साधन मिलेंगे और उनकी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आएगा। इसके अलावा, इस सुविधा के कारण क्षेत्र में बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, बिजली और पानी की सुविधाओं में भी सुधार होगा। यह कदम न केवल गांवों को आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि उनकी तरक्की को भी नई रफ्तार देगा।

दंतेवाड़ा में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा का शुभारंभ

दंतेवाड़ा में स्थापित की जा रही यह कोल्ड स्टोरेज सुविधा अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। इसकी क्षमता 1500 मीट्रिक टन है, जो स्थानीय किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इसमें तापमान और आर्द्रता को नियंत्रित करने की सुविधा मौजूद है, जिससे फसलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इस कोल्ड स्टोरेज में फ्रोजन स्टोरेज, छोटे कोल्ड रूम, ब्लास्ट फ्रीजर और रेडिएशन मशीन जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल हैं। यह सुविधा हर साल 10,000 मीट्रिक टन से अधिक उपज को संरक्षित करने में सक्षम होगी। इससे न केवल उपज की बर्बादी रुकेगी, बल्कि क्षेत्र के कृषि क्षेत्र को भी नया बल मिलेगा।

सरकारी पहल

यह कोल्ड स्टोरेज सुविधा प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत स्थापित की जा रही है। इस योजना के जरिए सरकार किसानों को उनकी उपज को सुरक्षित रखने और बाजार में उचित दाम दिलाने में सहायता कर रही है। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 25 करोड़ रुपये है, जिसमें 10 करोड़ रुपये केंद्र सरकार की योजना से और 14.98 करोड़ रुपये जिला खनिज निधि से खर्च किए जाएंगे। यह पहल सरकारी स्तर पर किसानों के हित में उठाया गया एक बड़ा कदम है।

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

इस कोल्ड स्टोरेज सुविधा का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय किसानों को होगा। अब वे अपनी उपज को लंबे समय तक स्टोर कर सकेंगे और बाजार में सही समय पर बेचकर बेहतर कीमत प्राप्त कर सकेंगे। खास तौर पर बस्तर क्षेत्र में इमली, महुआ, जंगली आम, देशी मसाले और बाजरा जैसी उपज का उत्पादन होता है, लेकिन संरक्षण के अभाव में हर साल 7 से 20 प्रतिशत उपज बर्बाद हो जाती है। यह सुविधा इस समस्या को खत्म करेगी और किसानों की आय में वृद्धि करेगी। साथ ही, यह सुविधा उन्हें नए बाजारों तक पहुंचने में मदद करेगी, जिससे उनकी उपज की मांग और कीमत दोनों बढ़ेंगी।

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