
Cyber क्राइम के अपराधियों को नहीं मिलेगी जमानत’, Supreme Court ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
72 वर्षीय महिला वकील से 3.29 करोड़ की ठगी के बाद कोर्ट का बड़ा फैसला
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए निचली अदालतों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में आरोपियों को जमानत देने से बचें। यह सख्त टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की गई जिसमें एक 72 वर्षीय महिला वकील को डिजिटल अरेस्ट कर 3.29 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी।

“असामान्य घटनाओं में असामान्य हस्तक्षेप जरूरी” – सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट एक बेहद खतरनाक साइबर अपराध का रूप बन चुका है, जिसमें ठग बेखबर और बुजुर्ग व्यक्तियों को निशाना बनाते हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायालयों को अत्यंत सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि:
- अपराधी पीड़ितों को मानसिक रूप से भयभीत कर हाई-प्रोफाइल अपराधों में फंसा देने का झांसा देते हैं।
- बुजुर्गों को उनकी जीवनभर की जमा पूंजी एक झटके में गंवानी पड़ रही है।
- देशभर में डिजिटल अरेस्ट ठगी तेजी से बढ़ रही है और गैंग विदेशी नेटवर्क से जुड़े होते हैं।
कोर्ट ने निचली अदालतों को दिए स्पष्ट निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी को जमानत देने से पहले अदालतें अपराध की गंभीरता, गिरोह की संरचना एवं पीड़ित पर पड़े मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर विचार करें। कोर्ट ने टिप्पणी की:
“असामान्य घटना के लिए असामान्य हस्तक्षेप आवश्यक है।”
कोर्ट का यह निर्णय साइबर अपराधों के विरुद्ध कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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