
सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, समय सीमा नहीं…लेकिन किसी भी बिल को रोक नहीं सकते
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा विधेयकों की मंजूरी से जुड़े प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर अहम फैसला सुनाया। अदालत ने साफ कर दिया कि राज्यपाल किसी भी बिल को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकते। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय करना संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्यपाल के पास किसी भी बिल पर केवल तीन विकल्प होते हैं—मंजूरी देना, दोबारा विचार हेतु वापस भेजना या राष्ट्रपति के पास भेजना। बिना इन प्रक्रियाओं का पालन किए बिलों को रोककर रखना सहयोगात्मक संघवाद के विरुद्ध माना जाएगा।

जानिए मामला
यह विवाद तमिलनाडु में राज्यपाल द्वारा कई विधेयकों को लंबित रखने के बाद उठा था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही यह टिप्पणी की थी कि राज्यपाल के पास बिलों पर ‘वीटो पावर’ नहीं है। राष्ट्रपति द्वारा उठाए गए 14 सवालों पर कोर्ट ने आज विस्तृत राय दी। कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अधिक देरी की स्थिति में न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है, लेकिन विधायिका और कार्यपालिका की शक्तियों में सीधे दखल देना उचित नहीं होगा।
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