
वकील के जरिए भेजे गए तलाक नोटिस मान्य नहीं: Supreme Court
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पुरुषों द्वारा वकील के माध्यम से भेजे जाने वाले तलाक नोटिसों की वैधता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि तलाक का नोटिस स्वयं पति के हस्ताक्षर के बिना भेजा जाता है, तो उसे वैध तलाक नहीं माना जाएगा।
हस्ताक्षर रहित नोटिस अमान्य
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तलाक जैसे गंभीर निर्णय के लिए पति का स्पष्ट बयान और हस्ताक्षर आवश्यक है। कोई भी नोटिस जो वकील द्वारा भेजा गया हो और उसमें पति का हस्ताक्षर न हो, वह कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा।

तीन महीने में तीन नोटिस भेजने की प्रथा पर सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस प्रचलित प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए, जिसमें पति वकील को अधिकृत कर देता है कि वह एक-एक महीने के अंतराल पर तीन तलाक नोटिस भेज दे। कोर्ट ने कहा कि ऐसी प्रथा में पति की “स्पष्ट इच्छा” और “सिद्ध संकल्प” दिखाई नहीं देता।
मामले का स्रोत
यह टिप्पणी 20 नवंबर 2025 को टीएनएन के संवाददाता धनंजय महापात्रा की रिपोर्ट में सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी तलाक प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश मानी जा रही है, जो भविष्य में ऐसे मामलों में स्पष्टता प्रदान करेगी।
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