
ठाणे में अवैध इमारतों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: अंडरवर्ल्ड से संबंधों के चलते गिराने का आदेश बरकरार
नई दिल्ली, जून 2025:
सुप्रीम कोर्ट ने ठाणे (महाराष्ट्र) में स्थित कई अवैध रूप से निर्मित इमारतों को ध्वस्त करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इन निर्माण कार्यों के पीछे अंडरवर्ल्ड सिंडिकेट का हाथ है और इस कारण इन्हें वैध ठहराना किसी भी प्रकार से न्यायोचित नहीं हो सकता।
न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने यह टिप्पणी की कि इन इमारतों को कानूनी रूप से स्वीकृति देना “कानून के शासन के सिद्धांत पर कुठाराघात” होगा। कोर्ट ने कहा कि इन निर्माणों की वैधता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता, जो कि कथित रूप से गैंगस्टर इकबाल मिर्ची से जुड़े हुए हैं, उन्हें इस प्रकार की राहत देना गलत संदेश देगा।
अदालत ने यह भी कहा कि यह मामला सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं है, बल्कि उससे भी गंभीर है क्योंकि इसमें अंडरवर्ल्ड की संलिप्तता पाई गई है। कोर्ट ने ठाणे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन द्वारा की गई कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कहा कि सार्वजनिक हित को देखते हुए इस प्रकार के निर्माणों पर कठोर निर्णय आवश्यक है।

पृष्ठभूमि और मामला
यह मामला उन इमारतों से जुड़ा है जो महाराष्ट्र के ठाणे में अवैध रूप से बनाई गई थीं और जिनके पीछे माफिया नेटवर्क की भूमिका बताई गई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इन इमारतों को गिराने का आदेश दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी वैध ठहराया है।

न्यायालय की सख्त टिप्पणी:
“ऐसे व्यक्तियों को राहत देना जो माफिया तत्वों से जुड़े हों, न्याय और समाज के हित के खिलाफ होगा।”
यह निर्णय न केवल ठाणे बल्कि पूरे देश में अवैध निर्माणों के विरुद्ध सख्त रुख का संकेत है, विशेषकर तब जब उनके तार संगठित अपराध या अंडरवर्ल्ड से जुड़े हों।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय एक नजीर बनकर उभरा है, जो बताता है कि भारत की न्यायपालिका अवैध गतिविधियों और उनके संरक्षण में बने निर्माणों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगी।
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