
Bilaspur में पुलिस की अवैध गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट नाराज
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा की गई अवैध गिरफ्तारी पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। साथ ही राज्य सरकार को आदेश दिया कि पीड़ित को 10 हजार रुपये का मुआवजा तत्काल प्रदान किया जाए।
एक महीने का समय दिया था आत्मसमर्पण के लिए
मामला हत्या के एक आरोपी से जुड़ा है, जिसे हाईकोर्ट ने स्वयं कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के लिए एक महीने का समय दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने आरोपी को समय अवधि पूरी होने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया।

डिवीजन बेंच ने जताई कड़ी नाराजगी
याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि जब कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था, तब पुलिस का आरोपी को गिरफ्तार करना कानून के नियमों और न्यायिक आदेशों का उल्लंघन है।
मौलिक अधिकारों का हनन माना कोर्ट ने
बेंच ने टिप्पणी की कि इस तरह की कार्रवाई आरोपी के व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का हनन है। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए पुलिस को न्यायालय के आदेशों का सम्मान करना होगा।
राज्य सरकार को देना होगा मुआवजा
हाईकोर्ट ने इस अवैध गिरफ्तारी से हुए मानसिक और कानूनी नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार को पीड़ित को 10,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही पुलिस अधिकारियों को भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराने की चेतावनी भी दी गई।
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