
छत्तीसगढ़ के दुर्ग ने रचा जल संरक्षण का कीर्तिमान: पीएमएवाई घरों में 2 घंटे में बने 1,200 सोखता गड्ढे
दुर्ग, 16 जून 2025:
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में इतिहास रचते हुए एक नया रिकॉर्ड बनाया है। 13 जून की सुबह प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत बने घरों में मात्र 2 घंटे में 1,200 सोखता गड्ढे (रेनवाटर हार्वेस्टिंग पिट) तैयार किए गए। यह अभियान न केवल एक आंकड़ा है, बल्कि भूजल स्तर की खतरनाक गिरावट को रोकने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है, खासकर दुर्ग और धमधा ब्लॉक जैसे तनावग्रस्त क्षेत्रों में।
सामुदायिक प्रयास से बना रिकॉर्ड
‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के तहत शुरू हुई इस पहल का नेतृत्व दुर्ग जिला पंचायत के सीईओ बजरंग दुबे ने किया। उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से समुदाय द्वारा संचालित प्रयास था, जिसका उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण करना और इसे एक जन आंदोलन में बदलना था।” इस अभियान में दुर्ग, धमधा और पाटन के तीन विकास खंडों में सैकड़ों स्वयंसेवकों, स्थानीय निवासियों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया। यह अभियान दो घंटे में 1,200 सोखता गड्ढों के निर्माण के साथ पूरा हुआ।

भूजल संकट पर रणनीतिक हस्तक्षेप
दुर्ग और धमधा ब्लॉक को भूजल की कमी के कारण ‘तनावग्रस्त क्षेत्र’ के रूप में चिह्नित किया गया है। इन क्षेत्रों में भूजल स्तर 600 से 800 फीट की गहराई पर है, जिसके कारण जल संरक्षण के प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। सोखता गड्ढे वर्षा जल को जमीन में सोखकर भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करेंगे, जिससे जल संकट की समस्या में कमी आएगी। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।
प्रशासन की प्रतिबद्धता
जिला कलेक्टर और पंचायत के सीईओ बजरंग दुबे ने इस उपलब्धि को जिले की एकता और पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि जिले का हर घर जल संरक्षण का हिस्सा बने।” प्रशासन ने भविष्य में और अधिक सोखता गड्ढे बनाने और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की योजना बनाई है।
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