
तोमर बंधु की जमानत अर्जी खारिज, पत्नी और भतीजे को राहत
संगठित अपराध मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
नई दिल्ली। संगठित अपराध के एक मामले में तोमर बंधु को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है, जबकि उनकी पत्नी और भतीजे को राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली है। इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा पैदा कर दी है।

बचाव पक्ष का आरोप — पुलिस ने झूठे केस में फंसाया
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस ने टोंमर परिवार को जानबूझकर संगठित अपराध के मामले में फंसाया है। वकीलों का कहना है कि मामले में व्यक्तिगत रंजिश और राजनीतिक दबाव की भूमिका हो सकती है। उन्होंने अदालत से परिवार को राहत देने की मांग की।
सरकारी पक्ष का दावा — अपराध इतिहास रहा विस्तृत
वहीं सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि दोनों भाइयों के खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं और उनका अपराध रिकॉर्ड लंबा है। सरकारी पक्ष ने कहा कि समाज में भय का माहौल कायम रखने और अपराध गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप गंभीर हैं, इसलिए जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तोमर बंधु की जमानत अर्जी खारिज कर दी, जबकि यह माना कि पत्नी और भतीजे के खिलाफ आरोप उतने गंभीर नहीं हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जा सकती है।
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