
ईरान के परमाणु रेडिएशन रिसाव का असर किन देशों पर पड़ सकता है
तेहरान, 14 जून 2025: ईरान के नतांज परमाणु संयंत्र पर हाल ही में हुए इजरायली हवाई हमलों के बाद रेडिएशन रिसाव की खबरें सामने आई हैं। ईरान की परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने पुष्टि की है कि नतांज संयंत्र के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि उन्होंने दावा किया है कि रेडिएशन या रासायनिक प्रदूषण का कोई बड़ा रिसाव नहीं हुआ। फिर भी, विशेषज्ञों और क्षेत्रीय देशों में इस घटना को लेकर चिंता बढ़ रही है।
किन देशों पर पड़ सकता है असर?
नतांज संयंत्र मध्य ईरान में स्थित है, और यदि रेडिएशन रिसाव की स्थिति गंभीर होती है, तो इसका असर न केवल ईरान बल्कि पड़ोसी देशों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हवा और पानी के जरिए रेडियोधर्मी पदार्थ फैलने की स्थिति में निम्नलिखित देश प्रभावित हो सकते हैं:
- कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE): फारस की खाड़ी में स्थित ये देश नतांज से अपेक्षाकृत नजदीक हैं। यदि रेडिएशन फारस की खाड़ी के जलस्रोतों में फैलता है, तो इन देशों के पीने के पानी और समुद्री खाद्य आपूर्ति पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।
- इराक और सऊदी अरब: हवा के प्रवाह के आधार पर, रेडियोधर्मी कण इन देशों की सीमाओं तक पहुंच सकते हैं, जिससे कृषि, पानी और मानव स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
- इजरायल और सीरिया: विडंबना यह है कि रेडिएशन रिसाव का असर हमला करने वाले इजरायल पर भी पड़ सकता है, क्योंकि हवा की दिशा के आधार पर रेडियोधर्मी बादल इस क्षेत्र में फैल सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने हमले को “गंभीर रूप से चिंताजनक” बताया और कहा कि परमाणु सुविधाओं पर हमले से मानव और पर्यावरण को खतरा हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि नतांज में अभी तक रेडिएशन स्तर में कोई वृद्धि दर्ज नहीं की गई है।

भारत के पूर्व परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रमुख अनिल काकोडकर ने कहा कि यदि परमाणु सामग्री और विस्फोटक अलग-अलग रखे गए हैं, तो बड़े रिसाव या विस्फोट का खतरा कम है। फिर भी, सुविधा के भीतर या आसपास सीमित रेडिएशन रिसाव संभव है, जो वहां काम करने वाले कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है।
क्षेत्रीय तनाव और प्रतिक्रिया
ईरान ने हमले को “बर्बर” करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और IAEA की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, इजरायल ने दावा किया कि यह हमला ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोकने के लिए “आवश्यक और सटीक” था।
इस बीच, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों ने क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील की है। कतर के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि बुसहेर परमाणु संयंत्र पर कोई भी हमला क्षेत्रीय जलस्रोतों को दूषित कर सकता है, जिसका असर 72 घंटों के भीतर दिखाई दे सकता है।
आगे की स्थिति
विशेषज्ञों का मानना है कि नतांज संयंत्र में नुकसान सीमित है, और बड़े पैमाने पर रेडिएशन रिसाव की संभावना कम है। फिर भी, क्षेत्रीय देश अपनी निगरानी बढ़ा रहे हैं, और IAEA स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए है। यह घटना मध्य पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति को और जटिल बना सकती है, जिसके दीर्घकालिक परिणाम अभी स्पष्ट नहीं हैं।
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