
भारतमाला परियोजना घोटाला: एसडीएम, तहसीलदार और आरआई की गिरफ्तारी जल्द, अग्रिम जमानत याचिका खारिज
अदालत ने माना—प्रारंभिक जांच में गंभीर अनियमितताएं, आरोपियों पर कसा शिकंजा
रायपुर। छत्तीसगढ़ की बहुचर्चित भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाला मामले में अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। इस मामले में संलिप्त एसडीएम, तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक (RI) की अग्रिम जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। इसके साथ ही तीनों अधिकारियों की गिरफ्तारी की राह अब पूरी तरह साफ हो गई है।
अदालत ने दी सख्त टिप्पणी
जानकारी के अनुसार, अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में गंभीर अनियमितताओं के सबूत सामने आए हैं। अदालत ने माना कि इन अधिकारियों ने अपनी पदस्थापना का दुरुपयोग करते हुए मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया में हेराफेरी की है, जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
ACB-EOW की जांच में खुलासा
एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की संयुक्त जांच में यह खुलासा हुआ है कि भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहीत भूमि के लिए फर्जी दस्तावेज बनाकर मुआवजा राशि बढ़ाई गई। अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई।

अब तक कई अधिकारी गिरफ्तार
इस मामले में पहले ही तीन पटवारी — दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती घृतलहरे — को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब एसडीएम, तहसीलदार और आरआई की गिरफ्तारी भी जल्द होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, तीनों अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
करोड़ों के घोटाले से हड़कंप
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत यह मुआवजा घोटाला कई करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे खेल में उच्च स्तर पर और कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे।
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